Swami Vivekanad Punyatithi 2022 : युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर सीएम शिवराज ने किया नमन

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। “उठो जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”..विश्व को वेदांत और योग दर्शन का ज्ञान देने वाले भारत के आध्यात्मिक गुरू स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand death anniversary 2022) की आज पुण्यतिथि है।  4 जुलाई 1902 को 39 वर्ष की आयु में उनकी आसमयिक मृत्यु हुई थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

भारत के आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्र दत्त था। उनक समग्र जीवन युवाओं के लिए आदर्श है।  विवेकानंद की तीव्र बुद्धि वाले विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। महज 25 साल की उम्र में उन्होने सांसारिक मोह माया को त्यागकर संन्यास ले लिया था। उनका हिंदू धर्म और आध्यात्म के प्रति गहरा लगाव था। उन्होंने देश भर में भ्रमण कर धर्म, दर्शन, इतिहास, सामाजिक, विज्ञान, कला एवं साहित्यों साथ वेद, उपनिषद, भागवद् गीता, रामायण, महाभारत और पुराण पर अध्ययन किया। 1882 में वह दक्षिणेश्वर स्थित काली भक्त श्री रामकृष्ण परमहंस से मिले और यहीं से उनकी स्वामी विवेकानंद बनने की यात्रा प्रारंभ हुई। वे श्री रामकृष्ण परमहंस के परमप्रिय शिष्य थे।

सन 1893 में स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हें यहां दिए गए वक्तव्य के लिए आज भी याद किया जाता है। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द के कारण ही पहुँचा है। उनके विचार यद्यपि तत्कालीन राजनीतिक सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित थे, लेकिन वो आज भी प्रासंगिक है। युवाओं के लिए वे सदैव प्रेरणादायी रहे हैं। वे ओजस्वी और ऊर्जा से भरे हुए थे तथा युवाओं से आह्वान करते थे कि वे राष्ट्र और अपनी प्रगति के लिए आए आएं और स्वस्थ व मजबूत मनोबल वाले बनें। उन्होने युवाओं से कहा कि सदैव सत्य के मार्ग पर चलो और विजय तुम्हारी होगी। जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने और उसके लिए दृढ़ संकल्पित होकर आगे बढ़ने के लिए उन्होने हमेशा युवाओं को प्रेरित किया। हमारे देश में स्वामी विवेकानन्द को एक देशभक्त सन्यासी के रूप में माना जाता है और उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज के समय में आवश्यकता है कि न सिर्फ युवा बल्कि सभी उनके जीवन से प्रेरणा ग्रहण करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलें।