UGC का महत्वपूर्ण फैसला, प्रवेश निरस्त होने पर विश्वविद्यालय को रिफंड करनी होगी पूरी फीस, छात्रों को मिलेगा लाभ, जानें प्रोसेस

यदि छात्र 31 अक्टूबर से पहले अपने प्रवेश को कैंसिल करते हैं तो उन्हें पूरी की पूरी फीस वापस की जाएगी।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। यूजीसी (UGC) ने एक बार फिर से छात्रों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लिया है। दरअसल महाविद्यालय (Colleges) द्वारा प्रवेश निरस्त किए जाने के बाद अब छात्रों को पूरी फीस रिफंड (Fees Refund) की जाएगी। इस मामले में सारे यूनिवर्सिटी (university) के लिए यह नियम अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं यदि छात्र 31 अक्टूबर तक एडमिशन (admission) के लिए अप्लाई करते हैं और विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश को कैंसिल किया जाता है तो उसे पूरी फीस वापस की जाएगी।

वही यूजीसी के इस फैसले के बाद छात्रों को बड़ी राहत मिलती नजर आ रही है। बता दे कि CUET UG 2022 की परीक्षा शुरू हो गई है। जबकि परीक्षा 20 अगस्त को समाप्त होगी। ऐसे में कई छात्रों द्वारा कई निजी विश्वविद्यालय में भी प्रवेश लिया जा चुका है। ऐसी स्थिति में जब तक सेंट्रल यूनिवर्सिटी में यूजी के लिए प्रवेश शुरू होंगे। तब तक अन्य विश्वविद्यालय के रिफंड विंडो को बंद कर दिया जाएगा।

जिससे छात्रों को नुकसान लग सकता था अब यूजीसी के इस फैसले के बाद रिफंड पॉलिसी को अक्टूबर तक के लिए मान्य कर दिया गया। ऐसे में यदि छात्र 31 अक्टूबर तक विश्वविद्यालय से अन्य विश्वविद्यालय में माइग्रेट करते हैं या अपने प्रवेश को वापस लेते हैं तो छात्रों को उनके प्रवेश की पूरी फीस रिफंड की जाएगी।

Read More : पीएम मोदी पर निशाना साधते-साधते ये क्या बोल गए राहुल गांधी, सीएम शिवराज ने किया पलटवार

यूजीसी ने कहा कि यदि छात्र 31 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच अपने एडमिशन को वापस लेते हैं तो 1000 से अधिक की कटौती के बाद छात्र से ली गई पूरी फीस उन्हें वापस कर दी जाएगी। यदि छात्र 31 अक्टूबर से पहले अपने प्रवेश को कैंसिल करते हैं तो उन्हें पूरी की पूरी फीस वापस की जाएगी।

बता दें कि यूजीसी द्वारा 12 जुलाई 2022 को उच्च शिक्षण संस्थानों से परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद स्नातक प्रवेश की अंतिम तिथि तय करने का अनुरोध किया गया था। जुलाई में ही फीस वापसी को लेकर पॉलिसी तैयार की गई थी। मामले में आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश अक्टूबर 2022 तक जारी रह सकते हैं।

यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालय को निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को यह निर्देश दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि छात्रों के अभिभावकों को किसी भी तरह की वित्तीय दिक्कत का सामना ना करना पड़े।