शरद पूर्णिमा के दिन खुले आसमान के नीचे क्यों रखी जाती है खीर, क्या होता है इससे फायदा

    डेस्क रिपोर्ट। हमारे देश को त्योहारों का देश भी कहा जाता है दुनिया में जितने पर्व जोश और उत्साह के साथ यहाँ मनाए जाते है पूरी दुनिया में इतने कही नहीं मनाए जाते है,  खास बात यह है कि यहाँ हर त्योहार मनाने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण होता है। फिर चाहे वह कारण ज्योतिष आधार पर हो या फिर वैज्ञानिक कारण, ऐसे ही शारदेय नवरात्र के बाद शरद पूर्णिमा मनाने का भी एक बेहद खास कारण है। इस साल शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर को है। शरद पूर्णिमा आश्विन मास की शुक्ल पक्ष के दिन हर वर्ष शरद पूर्णिमा के रूप में लोग मनाते हैं।

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    हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। शरद पूर्णिमा की रात को घरों की छतों पर खीर रखते हैं। शरद पूर्णिमा की रात का क्या महत्व होता है और यह बेहद खास क्यों मानी जाती है। आज हम बताएंगे आपको-

    शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात निकलने वाले चांद की किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं। इसलिए लोग इस दिन को अति शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस रात माता लक्ष्मी इस पृथ्वी पर भ्रमण करने के लिए आती हैं। इसलिए लोग इस दिन लक्ष्मी माता के भोग के लिए खीर भी बनाते हैं। साथ ही लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग विधि-विधान के साथ पूजा भी करते हैं।

     

    क्यों शरद पूर्णिमा की रात होती है खास
    आपको बता दें कि हिंदू ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने नौ लाख गोपिकाओं के साथ कई सारे रूपों में महारास रचाया था इसलिए इस रात का विशेष महत्व होता है। आपको बता दें कि शरद पूर्णिमा की रात पर महर्षी च्यवन को आरोग्य का पाठ और औषधि का ज्ञान अश्विनी कुमारों ने ही दिया था। इस कारण से अश्विनी कुमार आरोग्य के दाता हैं और पूर्ण चंद्रमा अमृत का स्रोत माना जाता है। साथ ही शरद पूर्णिमा पर उत्तर भारत के ज्यादातर लोग अपनी छत पर खीर बनाकर इसलिए रखते हैं ताकि चंद्रमा की अमृत की बूंदें भोजन में समा जाए। ऐसा माना जाता है कि इसके बाद खीर खाने से समस्त रोग दूर होते हैं। आपको बता दें कि शरद पूर्णिमा पर अविवाहित कन्याएं व्रत रखती हैं और चन्द्र देव की पूजा अर्चना करके व्रत समाप्त करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस तरह से व्रत करने पर कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।आपको बता दें कि शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर आती है और लोगों की मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। कई लोग माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनका विशेष पाठ भी करते हैं।