370 का साइड इफेक्ट: ग्वालियर मेले में इस बार कश्मीरी सेक्टर रह सकता है खाली

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ग्वालियर। उत्तर भारत के सबसे पुराने मेले में से एक ग्वालियर व्यापार मेले की रौनक रहने वाला कश्मीरी। सेक्टर इस बार सूना रहने की आशंका है। हर बार की तरह इस बार भी मेला प्राधिकरण ने इस सेक्टर के  लिए 100 दुकाने आरक्षित कर कश्मीरी दुकानदारों को पत्र भेजकर सूचित कर दिया है लेकिन अब तक दुकानदारों की तरफ से  कोई जवाब नहीं मिला है। समझा जा रहा है कि धारा 370 और 35A हटने के बाद बने हालातों के कारण ऐसा हो रहा है। 

रियासतकालीन ग्वालियर व्यापार मेला अपनी खूबसूरती और अलग अलग सेक्टर में लगने वाली दुकानों के लिए पहचाना जाता है। यहाँ मनोरंजन के साथ साथ अलग अलग राज्यों के हस्त शिल्प से बने कपड़े खास तौर पर बिकने आते हैं इन्हीं में से एक है कश्मीरी सेक्टर,जो मेले की रौनक होता है। लेकिन इस बार इस सेक्टर के लगने की उम्मीद कम लग रही है। क्योंकि इस सेक्टर के लिए आरक्षित की गई दुकानों को हर साल  किराये पर लेकर व्यवसाय करने आने वाले कश्मीरी दुकानदारों ने अभी तक मेला प्राधिकरण को दो महीने पहले भेजे गए पत्र का उत्तर नहीं दिया है। मेला प्राधिकरण के अधिकारियों ने जब अपने स्तर से इसका कारण जाना तो मालूम चला कि जम्मू कश्मीर  से धारा 370 और 35A हटने के बाद लगे कर्फ्यू के चलते घाटी में लगातार कारोबार बंद रहा। जिसके कारण जरूरी माल तैयार नहीं हो पाया। इसलिए अब छोटे कारोबारी बाहर जाकर व्यवसाय नहीं कर पा रहे हैं। पूरे मामले पर मेला प्राधिकरण के सचिव मजहर हाशमी का कहना है कि कश्मीरी कारोबारियों की तरफ से अभी तक कोई सहमति नहीं मिली है यदि समय रहते इनकी सहमति नहीं आती है तो पंजाब और दिल्ली के से इनके दूसरे ग्रुपों को ये दुकानें आवंटित की जा सकती हैं। बहरहाल यदि मेले में कश्मीरी सेक्टर नहीं लगेगा तो इससे मेले की रौनक पर तो असर पड़ेगा ही साथ ही साथ मेले का कारोबार भी प्रभावित होगा।

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