लक्ष्मण सिंह की कांग्रेस के युवा नेताओं को नसीहत, कहा- “वरिष्ठों का करें सम्मान”

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। अपनी बेबाकी और बयानों से अपनी ही पार्टी को मुश्किलों में डालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह (Former Chief Minister And Rajyasabha MP Digvijay Singh’s Brother Lakshman Singh) ने कांग्रेस के युवा नेताओं (Young Leaders Of Congress) को नसीहत दी है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ (Former Chief Minister And PCC President Kamal Nath) के बेटे सांसद नकुल नाथ (MP Nakul Nath) और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे विधायक जयवर्धन सिंह (Jaivardhan Singh) को नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि नई पीढ़ी वरिष्ठों से सीखें और वरिष्ठों का आदर करें, तभी आगे बढ़ पाएंगे और तभी वरिष्ठों का आशीर्वाद मिलेगा।

गौरतलब है कि कांग्रेस में युवा विधायकों (Young MLA) की संख्या काफी ज्यादा है और कांग्रेस आगामी उपचुनाव (By-election) में युवाओं को स्टार प्रचारक बनाने पर विचार कर रही है। वहीं उन्होंने बीजेपी (BJP) पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने बेरोजगारी (Unemployment) को चुनावी (Election) मुद्दा बनाने पर कहा कि उसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। बल्कि इसका हल निकालने के लिए दोनों पार्टियों को मिलकर काम करना चाहिए।

सरकारी योजनाओं का जमीनी असर नहीं दिख रहा
उन्होंने कहा कि कोरोना (Corona) के चलते बेरोजगारी बढ़ी है और ऐसी स्थिति में बैंकों (Bank) को अपना रवैया बदलना चाहिए, क्योंकि बैंक बेरोजगारों को ऋण देने में आनाकानी कर रहे हैं और इन हालातों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों (Central And State Government) की योजनाओं का जमीन पर कुछ असर नहीं दिख रहा है।

बीजेपी के बाद हम जनता के बीच जाएंगे
एक तरफ कांग्रेस का जमीनी स्तर पर चुनाव प्रचार नजर नहीं आ रहा है और दूसरी तरफ तो सत्ताधारी दल भाजपा के बड़े नेताओं के 27 सीटों पर दौरे चल रहे हैं। इन दोनों को लेकर उन्होंने कहा कि पहले वह अपने दौरे कर लें। उनकी सुनने के बाद हम जनता के बीच जाएंगे और जनता को जवाब देंगे। इस बार जनता भाजपा को नकारेगी।

इंदिरा गांधी लेती थी अटल बिहारी वाजपेयी से राय
उपचुनाव को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी (National Leaders Of BJP) लगातार मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का दौरा कर रहे हैं। इन दोरों को लेकर उन्होंने कहा कि यह कितनी भी बैठक कर लें, लेकिन बैठक में कोई सही जानकारी नहीं देगा, क्योंकि इनकी बैठक में इन्हीं के लोग होते हैं। जानकारी लेना है, तो मीडिया (Media) से या विपक्ष (Opposition) से लें, जैसा इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) किया करती थीं। इंदिरा गांधी अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) से भी राय लेती थीं।

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