भाजपा में जाते ही सिंधिया के घर में दो धड़ों में बंटे समर्थक

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम की जय जयकार करने वाले ग्वालियर के कांग्रेसी अब दो धड़े में बंट गए हैं यानि श्रीमंत सिंधिया जिंदाबाद कहने वाले बहुत से कांग्रेसी उनके फैसले के साथ है जबकि बहुत से उनके खिलाफ। वहीं कुछ का कहना है कि उन्हें भाजपा में नहीं जाना था, अपने पिता की तरह अलग पार्टी बनानी थी।

मध्यप्रदेश में विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग से मचे सियासी घमासान में कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अचानक पाला बदलकर उस पार्टी का दामन थाम लिया जिसे वो पिछले 18 सालों से लगातार निशाने पर लेते रहे हैं। उनके इस फैसले का बड़ा असर देखने को मिला। पूरे प्रदेश में सिंधिया समर्थक मंत्री, विधायक और पदाधिकारियों ने इस्तीफे देना शुरू कर दिए। ग्वालियर में इसका और व्यापक असर हुआ यहाँ सिंधिया के साथ अब से पहले तक खड़े रहने वाले कांग्रेसी दो धड़ों में बंट गए। सिंधिया में आस्था रखने वाले और उन्हें अपना नेता मानने वाले कांग्रेसियों ने धड़ाधड़ इस्तीफे दे दिये और उनके भाजपा में जाने के फैसले का स्वागत किया। पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल ने प्रदेश महामंत्री पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि हम हर कदम सिंधिया जी के साथ हैं। ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि ये मान, सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई है हम इसके साथ हैं। पूर्व विधायक राम वरण सिंह का कहना है कि सिंधिया जी की लगातार उपेक्षा की जा रही थी कोई भी होता यही फैसला लेता। मैंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश महामंत्री सुनील शर्मा ने इस्तीफा देते हुए कहा कि पार्टी अपने उद्देश्य से भटक गई है इसलिए सिंधिया जी ने पार्टी छोड़ी। हम सब उनके साथ हैं। ग्रामीण जिला अध्यक्ष मोहन सिंह राठौर ने इस्तीफा देते हुए कहा कि सिंधिया जी हमारे नेता हैं उनके हर कदम पर हम उनके साथ हैं।

सिंधिया के फैसले का स्वागत करने वाले कांग्रेसियों के अलावा कुछ कांग्रेसी ऐसे भी हैं जो सिंधिया के फैसले से खुश नहीं हैं। पूर्व मंत्री राम निवास रावत ने कहा हमारी निष्ठा सिंधिया जी के साथ है लेकिन विचार बदले नहीं जाते। हम कांग्रेसी थे और कांग्रेसी ही रहेंगे। पूर्व सांसद रामसेवक सिंह ने कहा कि नुकसान और फायदे राजनीति में होते ही रहते हैं । सिंधिया जी को पार्टी नहीं छोड़नी थी। प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि सिंधिया जी को बातचीत से हल निकालना चाहिए था। 15 साल बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत से सत्ता में लौटी थी। उनका फैसला सही नहीं है। इसके अलावा कुछ कांग्रेसी ऐसे भी है जिनका मानना है कि सिंधिया को अलग पार्टी बनानी चाहिए थी। प्रदेश महामंत्री अशोक शर्मा ने कहा कि सिंधिया जी बड़े नेता हैं जो कुछ हुआ वो विचलित कर देने वाला है लेकिन हम वैचारिक रूप से कांग्रेसी हैं इसलिए भाजपा के साथ नहीं जा सकते। यदि वो अलग संगठन बनाते तो हम उनके साथ होते। शहर जिला अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा ने कहा मैं माधव राव सिंधिया से जुड़ा था। एक कांग्रेसी के नाते हम भाजपा से लड़ते रहे हैं। उसके साथ कैसे जा सकते हैं यदि सिंधिया जी विकास कांग्रेस की तरह अपनी पार्टी बनाते तो उनके साथ खड़े रहते। पूर्व जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंद्रमोहन नागौरी ने कहा कि पिछले लंबे समय से पार्टी ने उन्हें हाशिये पर रखा था ऐसे में उन्होंने वही कदम उठाया जो कोई भी स्वाभिमानी उठाता। लेकिन उन्हें भाजपा में नहीं जाना चाहिए था। मेरी राय में वे पिता की तरह विकास कांग्रेस जैसी पार्टी बनाते तो उनके साथ सभी लोग खड़े हो जाते ।