AIR INDIA: नही बिके “महाराजा” सरकार ने मीडिया की खबरों को बताया गलत

AIR INDIA 2007 में घरेलू ऑपरेटर इंडियन एयरलाइंस के साथ विलय के बाद से घाटे में है।

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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। सरकार ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों (media reports) का खंडन किया। जिसमें दावा किया गया था कि टाटा संस (TATA sons) ने कर्ज में डूबी एयर इंडिया (AIR INDIA) के अधिग्रहण की बोली जीत ली है। Modi Government ने कहा कि बोलियों का मूल्यांकन किया जा रहा है और निर्णय लिया जाना बाकी है।

निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव ने ट्विटर पर स्पष्ट किया कि एआई विनिवेश मामले में भारत सरकार द्वारा वित्तीय बोलियों को मंजूरी देने वाली मीडिया रिपोर्ट गलत हैं। Media को सरकार के फैसले के बारे में सूचित किया जाएगा। इससे पहले TATA को सरकारी पैनल द्वारा एयर इंडिया (AIR INDIA) के लिए विजेता बोलीदाताओं के रूप में चुना गया है। टाटा समूह उन कई संस्थाओं में शामिल था, जिन्होंने महाराजा को खरीदने के लिए दिसंबर 2020 में प्रारंभिक रुचि की अभिव्यक्ति दी थी। स्पाइसजेट के संस्थापक अजय सिंह भी बोली लगाने वालों में शामिल थे।

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एयर इंडिया 2007 में घरेलू ऑपरेटर इंडियन एयरलाइंस के साथ विलय के बाद से घाटे में है। टाटा को अब घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट के साथ-साथ विदेशों में हवाई अड्डों पर 900 स्लॉट का नियंत्रण मिलेगा। एयरलाइन की स्थापना प्रसिद्ध उद्योगपति और परोपकारी जेआरडी टाटा ने की थी। जो भारत के पहले लाइसेंस प्राप्त पायलट थे। इसने मूल रूप से 1930 के दशक में तत्कालीन अविभाजित, ब्रिटिश शासित भारत और बॉम्बे- कराची के बीच मेल किया।

इससे पहले रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रियों के एक पैनल ने एयरलाइन के अधिग्रहण के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। आने वाले दिनों में एक आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है।मौजूदा समय में एअर इंडिया देश में 4400 और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है।

इस सौदे से टाटा को नुकसान भी होगा क्योंकि साल 2007 में इंडियन एयरलाइंस (Indian Airlines) में विलय के बाद से एअर इंडिया कभी नेट प्रॉफिट में नहीं रही है. एअर इंडिया में मार्च 2021 में खत्म तिमाही में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका जताई गई। कंपनी पर 31 मार्च 2019 तक कुल 60,074 करोड़ रुपए का कर्ज था, लेकिन अब टाटा संस को इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ उठाना होगा।