इस सीट पर दिग्गज नेताओं का भविष्य दांव पर, एक राष्ट्रवाद तो दूसरे को विरासत का सहारा

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भोपाल। मध्य प्रदेश के पहले चरण में प्रदेश की छह सीटों पर चुनाव संपन्न हुए। इन छह सीटों से कई पर दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी है। इन छह में से पांच सीटों पर वर्तमान में भाजपा का क़ब्ज़ा है। केवल छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस के पास है।  सीधी लोकसभा क्षेत्र भी इनमें से एक है। यहां से बीजेपी ने वर्तमान सांसद रीती पाठक और कांग्रेस ने अजय सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इस बार सीधी में छह बजे तक 57.3 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है। 2014 में इस सीट पर 57 फीसदी वोटिंग हुई थी। हालांकि, अभी अंतिम आंकड़े आना बाकी है। 

पीछले चुनाव में इस सीट पर बीजेपी की रीती पाठक को 48.1% वोट मिल थे, जबकि कांग्रेस को इंद्रजीत कुमार को 37.2% वोट मिले थे। कांग्रेस के सामने इस बार पूरे 11 फीसदी वोट पाटने की चुनौती थी। पार्टी ने यहां से अजय सिंह को चुनावी रण में उतारा। वह हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में पांच हजार से कम वोटों से हारे थे। वहीं, बीजेपी की रीती पाठक के खिलाफ इस बार क्षेत्र में काफी विरोध भी था। 

पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के लिए यह चुनाव करो या मरो की स्थिति वाला है। वे पिछले दो चुनाव हार चुके हैं। 2014 में इसी सीट से लोकसभा का तो 2018 में अपनी पारंपरिक सीट चुरहट से विधानसभा का। वर्तमान में पार्टी में उनके पास कोई ख़ास पद भी नहीं है। अब एक हार उनके राजनीतिक भविष्य पर पूर्णविराम लगा सकती है। यहां से भाजपा ने सांसद रीति पाठक को ही वापस दोहराया है, लेकिन रीति का स्थानीय स्तर पर पार्टी के अंदर ही विरोध हो रहा है। उनको टिकट मिलने के विरोध में ज़िलाध्यक्ष स्तर के कई पार्टी पदाधिकारी पार्टी छोड़ चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक, रीति पाठक अपने कार्यकाल में स्थानीय मुद्दों पर काम नहीं कर पाई हैं। इसलिए भाजपा यहां राष्ट्रवाद के सहारे है। जबकि कांग्रेस के अजय सिंह वोट पाने के लिए अपने पिता की विरासत पर फोकस किए हुए हैं। स्थानीय मुद्दे छोड़ना भाजपा को भारी पड़ सकता है। ऊपर से पार्टी की अंदरूनी गुटबाज़ी भी कांग्रेस को फायदा पहुंचाती दिख रही है।