Shivraj Cabinet : कमलनाथ का एक और फैसला पलटा, विधानसभा में पेश किया जाएगा बिल

  पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) चाहते थे कि पार्षद मिलकर मेयर या पालिका अध्यक्ष चुनें, क्योंकि यही लोकतांत्रिक तरीका है, जैसे देश के प्रधानमंत्री और प्रदेशों में मुख्यमंत्री भी विधायक-सांसद मिलकर चुनते हैं।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। सत्ता में आने के बाद से ही प्रदेश की शिवराज सरकार (Shivraj Government) एक के बाद एक पिछली कमलनाथ सरकार ( Kamal Nath Government) के फैसलों को बदल रही है।  इसमें एक महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के बीच से कराने का भी फैसला था , जिसे शिवराज सरकार ने पलट दिया है, जिसके तहत अब जनता ही महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष को चुनेगी।  कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में लिए गए इस फैसले पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने कहा कि इससे अब मतदाता अध्यक्ष व महापौर के लिए सीधे वोट डाल सकेंगे।

दरअसल, अब महापौर और अध्यक्ष के चुनाव को लेकर लिया गया कमलनाथ सरकार का फैसला पलट दिया है, जिसके तहत अब मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में सीधे जनता ही मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव कर सकेगी। आज शिवराज कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि अध्यक्ष व महापौर का निर्वाचन अब प्रत्यक्ष प्रणाली के माध्यम से होगा। इसके लिए अध्यादेश आ चुका है, अब विस में बिल प्रस्तुत किया जाएगा। वार्डों का निर्धारण भी पूर्व अनुसार होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि इससे अब मतदाता अध्यक्ष एवं महापौर के लिए सीधे वोट डाल सकेंगे।खास बात ये है कि इसके पीछे दोनों सरकारों के अलग अलग तर्क है।  पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) चाहते थे कि पार्षद मिलकर मेयर या पालिका अध्यक्ष चुनें, क्योंकि यही लोकतांत्रिक तरीका है, जैसे देश के प्रधानमंत्री और प्रदेशों में मुख्यमंत्री भी विधायक-सांसद मिलकर चुनते हैं।वही शिवराज सरकार का कहना है कि यह जनता का विशेषाधिकार है, इसलिए महापौर और अध्यक्ष जनता ही चुनें, इससे विकास तेजी से होता है।

ये है पूरा मामला

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में 1999 से महापौर का चुनाव सीधे जनता यानी प्रत्यक्ष प्रणाली से हो रहा था। जिस पर पूर्व की कमलनाथ सरकार ने आते ही संशोधन कर अप्रत्यक्ष प्रणाली को मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही एक्ट में बदलाव कर कहा गया था कि चुनाव में जीत कर आए पार्षद महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव कर सकते हैं। कमलनाथ सरकार के इस फैसले का बीजेपी ने जमकर विरोध भी किया था लेकिन सरकार ने अध्यादेश के जरिए व्यवस्था में बदलाव किया और फिर विधानसभा में नगर पालिका अधिनियम में संशोधन विधेयक पारित कराकर 27 जनवरी को इसे लागू कर दिया था।अब इस पूरे फैसले को शिवराज सरकार ने पलट दिया है।

निकाय चुनाव की तैयारियां तेज, 9 को महापौर/अध्यक्ष पद का आरक्षण
मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) में उपचुनाव के बाद अब नगरीय निकाय चुनाव (Urban body elections) की तैयारियां तेज हो गई है। प्रदेश के नगरपालिक निगमों, नगरपालिकाओं और नगर परिषदों के आगामी सामान्य निर्वाचन के लिये महापौर (Mayor), अध्यक्ष पद (Preisdent) के आरक्षण की कार्यवाही (Reservation Process) 9 दिसम्बर, 2020 को सुबह 11 बजे से रवीन्द्र भवन, भोपाल (Bhopal) के सभागृह में की जायेगी।नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अनुसार महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण की कार्यवाही 407 नगरीय निकायों के लिये की जायेगी। इनमें 16 नगरपालिक निगम, 99 नगरपालिका और 292 नगर परिषद हैं। प्रदेश के पुराने 378 निकायों में से 315 का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा।

बता दें कि प्रदेश के 407 नगरीय निकाय में महापौर अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण होना है। इनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका, और 294 नगर परिषद चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा। वहीं पिछली बार की तरह इस बार भी 2011 की जनगणना के आधार पर ही आरक्षण किया जाएगा। इसका साफ मतलब है कि अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए आरक्षण ने बदलाव नहीं किया जाएगा।

(भोपाल से पूजा खोदाणी की रिपोर्ट)