बाढ़ प्रभावितों को बड़ी राहत, सीएम शिवराज के निर्देश पर तत्काल जारी हुआ यह आदेश

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र तोमर व टास्क फोर्स, प्रभारी मंत्रियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व पुनर्वास कार्यों की वीसी से समीक्षा की। उन्होने कहा कि प्रदेश के बाढ़ प्रभावितों को राहत देना व पुनर्वास, पुनर्निर्माण, पुनर्स्थापना ही शासन का ध्येय है। प्रदेश के बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत, पुनर्वास, पुनर्निर्माण, पुनर्स्थापना ही शासन की नीति है, जिसपर अमल किया जा रहा है। अतिवृष्टि और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय दल 16 अगस्त से क्षेत्र का भ्रमण करेगा। वर्षा, बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण आवासीय मकानों को भारी मात्रा में क्षति हुई है। प्रभावित परिवारों को आवास की अंतरिम व्यवस्था के लिए एक मुश्त 6 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के आदेश राज्य शासन द्वारा जारी कर दिये गये हैं।

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बाढ़ प्रभावितों को बड़ी राहत, सीएम शिवराज के निर्देश पर तत्काल जारी हुआ यह आदेश

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रभावितों के साथ प्रदेश सरकार पूरी ताकत के साथ खड़ी है और इस चुनौती से बाहर निकालने के लिए सतत प्रयत्नशील है। राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर पूर्ण किया जा रहा है। इसी के साथ पूर्ण रूप से नष्ट हुए मकानों के निवासियों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए 6 हजार की राशि तत्काल दिए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। बिजली व्यवस्था की स्थापना, खाद्य सामग्री की आपूर्ति, अधोसंरचना को पुन: स्थापित करने, क्षतिग्रस्त फसलों व गिर गये घरों के सर्वे के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जायेगा। सीएम ने बैठक में निर्देश दिए कि जो गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं, उन्हें ऊंचे स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। जिनके मकान बाढ़ से प्रभावित हुए, उनके नए आवास ऊंचे स्थान पर ही स्वीकृत किए जाएंगे।

वर्चुअली बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जारी राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा के दौरान सीएम को अवगत कराया गया कि बाढ़ प्रभावितों को छह-छह हजार रुपए की राहत राशि मिलना आरंभ हो गई है। अब तक 6 करोड़ 50 लाख रुपए वितरित किए जा चुके हैं। सीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जारी राहत और पुनर्वास कार्यों की जिलेवार समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि युद्धस्तर पर बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत व्यवस्था की जाए। ये भी सतर्कता रखी जाए कि किसी अपात्र का नाम राहत और पुनर्वास कार्य में न जुड़े। राजस्व, पंचायत और कृषि विभाग की संयुक्त टीम और क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य मिलकर प्रभावितों का सर्वे करें। अंतिम सूची सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित की जाए और दावे आपत्तियों की सुनवाई हो। राहत वितरण और पुनर्वास के कार्य जनसहभागिता से क्रियान्वित हो। ग्राम स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों, जनप्रतिनिधियों और विधायकों को इन कार्यों से जोड़ा जाए। जो गांव अभी भी प्रभावित हैं और जहां अभी भी आश्यकता है वहां स्वसहायता समूहों के माध्यम से पका हुआ गरम भोजन उपलब्ध कराया जाए। जिला कलेक्टर भोजन के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें।