पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद विभाग ने जारी किए थे आदेश, 3 दिन में बदला फैसला, जाने कारण

पिछले आदेश को निरस्त करने के बाद हालांकि नए कोई आदेश जारी नहीं किया गया।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव (MP Panchayat Election) को निरस्त कर दिया गया है। पंचायत चुनाव (panchayat chunav) के निरस्त होने के बाद अब पंचायतों (panchayats) के संचालन पर लगातार संशय की स्थिति बनी हुई है। हालांकि राज्य सरकार द्वारा पंचायत के संचालन की जिम्मेदारी प्रधान प्रशासनिक समिति को सौंपी गई थी। जिसे 3 दिन में ही बदल दिया गया है। दरअसल 3 दिन के बाद सरकार ने प्रधान प्रशासनिक समिति से पंचायत संचालन की जिम्मेदारी को वापस ले लिया है।

ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में 6 जनवरी को एक आदेश जारी किए गए थे। जिसके मुताबिकआदेश के मुताबिक पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत के कार्य का संचालन प्रधान प्रशासन के समिति को सौंपा था। जिसके बाद सरपंच और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खातों के संचालन के अधिकार दिए गए थे। जनपद और जिला पंचायत स्तर पर व्यवस्था लागू कर दी गई थी। 3 दिन के बाद ही वापस से फैसले को बदल दिया गया है। हालांकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अपने फैसले को निरस्त कर दिया है।

इस आदेश के निरस्त होने के बाद एक बार फिर से मध्य प्रदेश में पंचायत के संचालन को लेकर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पिछले आदेश को निरस्त करने के बाद हालांकि नए कोई आदेश जारी नहीं किया गया। पंचायत के संचालन की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी। इस बात पर चर्चा गंभीर होती जा रही है। फिलहाल सरकार द्वारा इस मुद्दे पर कोई भी बात सामने नहीं आई है।

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मध्य प्रदेश में मार्च 2020 में 22604 पंचायत में सरपंच और पंच का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इसके साथ ही 6774 जनपद पंचायत सदस्यों का भी कार्यकाल समाप्त हो चुका है जबकि 841 जिला पंचायत सदस्य कभी कार्यकाल पूरा हो चुका है। जिसके प्रदेश में पंचायत चुनाव आयोजित किए जाने थे।  हालांकि Corona की पहली और दूसरी लहर को देखते हुए प्रदेश में पंचायत चुनाव टाल दिए गए थे। वहीं तीसरी बार पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही ओबीसी आरक्षण सहित अन्य मुद्दे पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। सुनवाई के बाद पंचायत चुनाव निरस्त कर दिया गया था। चुनाव की तारीख की घोषणा होने के बाद भी किसी न किसी कारण से चुनाव टलते रहे।

जिसके बाद घोषित हुई आचार संहिता भी समाप्त कर दी गई है। पंचायतों का कार्य प्रभावित ना हो। इसके लिए पूर्व सरपंच को ही प्रधान बनाकर अधिकार दिए गए थे। इसके लिए शासकीय समिति बनाने की व्यवस्था भी की गई थी। अब सवाल यह उठता है कि सरकार द्वारा नए आदेश जारी नहीं किए गए हैं जबकि पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है। ऐसे में पंचायत के संचालन की जिम्मेदारी किसे देगी। वहीं पंचायत में कार्य शैली का निर्धारण किस प्रकार से तय किया जाएगा।