मप्र चुनाव: नतीजों से पहले गौर के रुख से भाजपा परेशान

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भोपाल। मध्य प्रदेश में 15 साल से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार को चौथी बार सत्ता में आने के लिए काँटों भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है| विरोधी पार्टियों से ज्यादा अपनों की नाराजगी ने ज्यादा खेल बिगाड़ा है| हालाँकि यह चुनाव के नतीजों के बाद ही साफ़ होगा कि बागी बीजेपी को कितना नुकसान पहुंचा पाए| वहीं पार्टी के लिए वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का रुख परेशानी का सबब बना हुआ है| बहु को टिकट मिलने के बाद भी गौर का रुख पार्टी नेताओं को समझ नहीं आ रहा है, वे लगातार बयानबाजी कर रहे हैं| इस बीच प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने अनुशासन तोड़ने वाले को दो टूक चेतावनी देते हुए गौर को नसीहत भी दी है| लेकिन गौर के तीखे तेवर अब भी बने हुए हैं जो बड़े नेताओं की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं| 

उम्र का फैक्टर बता कर मंत्रिमंडल से बाहर किये जाने के बाद से ही बाबूलाल गौर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करते रहे हैं और विधानसभा में भी अपनी ही सरकार को घेरते हैं| विपक्ष से ज्यादा उनके सवालों की चर्चा रहती है| वहीं 11 वीं बार भी चुनाव लड़ने के लिए भी गौर ने पूरी ताकत लगाई साथ ही बहु के लिए भी टिकट माँगा| अंतिम समय तक गोविंदपुरा सीट पर पार्टी फैसला नहीं ले पाई| इस बीच कांग्रेस के प्रति गौर के झुकाव से पार्टी ने आनन् फानन में उनकी बहु कृष्णा गौर को टिकट दे दिया| लेकिन टिकट मिलने के बाद भी गौर के तेवर नरम नहीं पड़े| वह लगातार बयानबाजी करते रहे| इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरिफ अकील को कांग्रेस की सरकार बनने की बधाई भी दे डाली| गौर यहीं नहीं रुके उन्होंने बीजेपी से बागी सरताज सिंह का समर्थन भी कर दिया, और यह तक कह दिया कि बीजेपी ने उनका अपमान किया है| इस बयान से पार्टी की किरकिरी हुई और बागियों को मजबूती मिली|  वहीं, शनिवार को उन्होंने कहा था कि यदि गोविंदपुरा से कृष्णा गौर को टिकट नहीं मिलता तो वे भाजपा को देख लेते। गौर के इस रुख से पार्टी चिंता में है और हर तरह से गौर को चुप्पी साधने के लिए कोशिश की जा रही है, नतीजों के बाद अगर बहुमत नहीं मिलता है तो गौर का रुख पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकता है, जिसके चलते गौर को साधने की कोशिश की जा रही है| 

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस बयानबाजी से नाराज होकर गोविंदपुरा से भाजपा प्रत्याशी और बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर से बातचीत की है। सूत्रों का कहना है कि शनिवार शाम को मुख्यमंत्री ने प्रदेश पदाधिकारियों के साथ पांच-पांच मिनट वन-टू-वन बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कृष्णा गौर से बाबूलाल गौर द्वारा लगातार की जा रही बयानबाजी पर नाराजगी प्रकट की। इसके बाद कृष्णा गौर ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया है कि अब इस तरह के बयान नहीं आएंगे।

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