सबसे सुरक्षित सीट पर BJP ने नए चेहरे पर लगाया दांव, भितरघात का खतरा

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भोपाल। मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर आखिरकार बीजेपी ने पत्ते खोल दिए हैं। सिर्फ इंदौर सीट पर पार्टी अभी भी विचार मंथन कर रही है। वहां ताई की सहमती नहीं होना देरी का कारण माना जा रहा है। वहीं, विदिशा से इस बार विदेश मंत्री और वर्तमान सांसद सुषमा स्वराज चुनाव नहीं लड़ रही हैं। बीजेपी की अब इस विरासत को रमाकांत भार्गव आगे बढ़ाएंगे। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है। लेकिन इस बार बीजेपी के लिए राह आसान नहीं है। क्योंकि, यहां इस बार भिरतघात के आसार बन रहे हैं, वहीं सुषमा स्वाराज की उपेक्षा के चलते स्थानीय लोग भाजपा से नाराज भी हैं| लेकिन इन सबके बाद भी भाजपा के लिए यह गढ़ सबसे सुरक्षित माना जाता है| कांग्रेस ने 10 बार से अजेय भाजपा के इस गढ़ को भेदने के लिए इछावर के पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल को मैदान में उतारा है| 

दरअसल, इस सीट पर सुषमा से पहले पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी जीत दर्ज की है। विदिशा में उनकी बड़ी लोकप्रियता है। पार्टी भी चाहती थी कि वह यहां से चुनाव लड़ें लेकिन उन्होंने पहले ही प्रदेश नहीं छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी। वहीं, अब पार्टी ने शिवराज के ही ख़ास रमाकांत पर मुहर लगाई है| रमाकांत भार्गव ऐसे नेता हैं जो कभी चुनवी मैदान में नहीं उतरे हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खास माने जाते हैं। वे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष हैं और अपेक्स बैंक के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। 

रमाकांत ही क्योंं चुने गए

रमाकांत के बारे में कहा जाता है कि उनका बुदनी और इछावर में बड़ा नेटवर्क है। ब्राह्मण होने के नाते उनके पास एक बड़ा वोट बैंक भी है। इस लोकसभा सीट में ब्राह्मण निर्णायक भूमिका में हैं। वह साफ सुथरी छवि के नेता माने जाते हैं।  उनके खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का मामला भी आज तक सामने नहीं आया है। इन सबसे अलग वह पूर्व सीएम शिवराज के खास और विश्वास पात्रों में गिने जाते हैं। 

भि���रघात का खतरा 

रमाकांत भार्गव का टिकट होने से विदिशा के स्थानीय प्रत्याशी बनाए जाने का मुद्दा गर्म हो सकता है क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष तोरण सिंह दांगी शिवराज सिंह के खास माने जाते हैं वहीं स्थानीय नेताओं ने सांसद सुषमा स्वराज से भी विदिशा से प्रत्याशी बनाए जाने की मांग की थी | कयास लगाए जा रहे थे कि महिला के तौर पर सुखप्रीत कोर को भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है, सुखप्रीत कौर सुषमा स्वराज की खास मानी जाती हैं | वहीं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव से भी रमाकांत भार्गव की तल्ख़ियां देखने को मिली है। 

क्या है अंक गणित

2011 की जनगणना के मुताबिक विदिशा की जनसंख्या 2489435 है.यहां की 81.39 फीसदी आबादी ग्रामीण और 18.61 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है. विदिशा में 18.68 फीसदी लोग अनुसूचित जाति के हैं और 5.84 अनुसूचित जनजाति के हैं. चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 में यहां पर कुल 16,34,370 मतदाता थे। इनमें से 7,61,960 महिला मतदाता और 8,72,410 पुरुष मतदाता थे। 2014 के चुनाव में इस सीट पर 65.68 फीसदी मतदान हुआ था।

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में सुषमा स्वराज ने कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह को हराया. बता दें लक्ष्मण सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्य के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भाई हैं। इस चुनाव में सुषमा स्वराज को 7,14,348(66.55 फीसदी) वोट मिले. वहीं लक्ष्मण सिंह को 3,03,650(28.29 फीसदी) वोट मिले. सुषमा स्वराज की जीत 4 लाख से ज्यादा वोटों से हुई थी। 2009 के चुनाव में भी सुषमा स्वराज को जीत मिली थी. उन्होंने सपा के चौधरी मुनाब्बर सलीम को 3.50 लाख से ज्यादा वोटों से करारी मात दी. सुषमा को 4,38,235(78.8 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं चौधरी मुनाब्बर सलीम को सिर्फ 48,391(8.7 फीसदी) वोट मिले।

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