उम्र बनी इस सीट पर दावेदारी में बाधा, ताई के टिकट पर सस्पेंस

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भोपाल। लोकसभा चुनाव के साथ ही कयासों का दौर और अटकलें भी तेज हो गई हैं। भोपाल के बाद इंदौर ऐसी दूसरी सीट है जिसपर बीजेपी की ओर से सस्पेंस बरकरार है। जबकि इस सीट से सुमित्रा महाजन लाखों वोटों के अंतर से चुनी जा ही हैं। लेकिन बीजेपी हाईकमान का मूड इस बार उनको घर बैठाने का है। प्रदेश की 29 सीट में से बीजेपी के 18 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। लेकिन इंदौर सीट जो भाजपा का कई दशकों से गढ़ मानी जाती है उस पर ताई के नाम की अब तक घोषणा नहीं होना इस बात के संकेत हैं कि केंद्रीय नेतृत्व किसी और को इस सीट से मौका देना चाहता है। सूत्रों के मुताबिक इंदौर महापौर मालिनी गौड़ का नाम आगे चल रहा है| 

दरअसल, पार्टी विथ डिफरेंस होने की बात करने वाली ‘नई’ भाजपा अब अपने फाउंडर सदस्यों को घर बैठाने की राह पर चल पड़ी है। 75 का आंकड़ा अब नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर भारी पड़ रहा है। पहले बीजेपी ने लालकृष्ण,आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांताकुमार, नजमा हेपतुल्ला, खंडूरी, जैसे  नेताओं का टिकट काटा अब इस बेला में इंदौर लोकसभा से लगातार आठ बार जीत दर्ज कर रही सुमित्रा महाजन का भी नंबर लगने वाला है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि महाजन को 75 प्लस क्लब में शामिल होने के कारण पार्टी उनका टिकट काटना चाहती है। सियासी गलियारों में ऐसी चर्चाएं जोरों पर हैं।

महाजन के करीबी नेताओं का कहना है कि पार्टी ताई को ही टिकट देगी। कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के कारण इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। सुमित्रा महाजन यहां से हर बार निर्विवाद तौर पर बीजेपी की उम्मीदवार चुनी गई हैं. लेकिन इस बार बीजेपी हाइकमान का रूख बदला हुआ सा लग रहा है. बीजेपी ने प्रदेश  में अपने 18  उम्मीदवार घोषित कर दिए है| लेकिन अभी तक बीजेपी हाइकमान ने इंदौर की सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है| माना जा रहा है कि इसकी एकमात्र वजह महाजन का 75 प्लस क्लब में शामिल होना है। दिल्ली से भोपाल तक उनका टिकट तय होने की खबर चलती रही। हालांकि संगठन राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के नाम पर भी विचार कर रहा है लेकिन विजयवर्गीय ने संगठन के समक्ष चुनाव लड़ने के बजाय पश्चिम बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी संभालने की इच्छा जताई है। उधर, ताई खेमे को भरोसा है कि टिकट ताई का ही होगा।