शिवराज के इरादों पर फिर सकता है पानी, ‘आभार’ यात्रा पर संकट

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भोपाल। एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा संगठन से बड़ा झटका लग सकता है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद आभार यात्रा निकालने जा रहे शिवराज के फैसले पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं| संगठन उनके इस फैसले में कोई खास रुचि नहीं दिखा रहा है। सूत्रों के मुताबिक शिवराज की इस यात्रा पर संकट मंडरा रहा है, संगठन विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब लोकसभा में भारी जाती दिलाने के लिए जुट गया है और लोकसभा चुनाव की रणनीति तय करना चाहता है। ऐसे में वह यात्रा निकालने के पक्ष में नही है। हालांकि अभी तक पार्टी की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया हैं।

दरअसल, हार के बाद पत्रकारों से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा था कि वे आने वाले दिनों मे आभार यात्रा निकालेंगें। यह यात्रा प्रदेश के 52 जिलो में निकाली जाएगी। इस यात्रा के माध्यम से जनता से मिलेंगें और उनका आभार जताएंगे। हालांकि उन्होंने यह साफ नही किया था कि यात्रा कब और कहां से निकाली जाएगी। शिवराज की इस यात्रा पर संगठन आपत्ति ले सकता है,  संगठन का मानना है कि दो चार महिनों बाद लोकसभा चुनाव है ऐसे में यात्रा निकालना ठीक नही। क्योंकि इस यात्रा में काफी समय लगेगा, जिसके कारण वे लोकसभा चुनाव को उतनी प्राथमिकता नही दे पाएंगें जितनी देना चाहिए। चुंकी हाल ही में बीजेपी को तीन राज्यों में हार का सामना करना पड़ा जिसका सीधा असर लोकसभा चुनाव पर पड़ना तय है ऐसे में संगठन इस यात्रा के पक्ष में नही।

बताते चले कि मुख्यंमंत्री इसके पहले भी कई यात्राएं निकाल चुके है। चुनाव से पहले उन्होंने  नर्मदा यात्रा, जनआशीर्वाद यात्रा, जनादेश यात्रा निकाली थी। इस दौरान उन्होंने 150 से ज्यादा सभाएं भी की थी,  लेकिन चौथी बार सरकार बनाने में सफल नहीं हो सके। लेकिन बावजूद इसके उन्होंने यात्रा निकालने का फैसला किया। शिवराज सिंह चौहान की आभार यात्रा दो तरीके से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी. पहला, लोकसभा चुनाव करीब हैं और चौहान मध्य प्रदेश से प्रभावशाली परिणाम सुनिश्चित करने में अपनी पूरी ताकत झोंकना चाहते हैं। दूसरा, आभार यात्रा  के माध्यम से, चौहान यह बताना चाहते हैं कि विधानसभा चुनावों में उनकी हार व्यक्तिगत नहीं थी और उन्होंने कांग्रेस को कांटे की टक्कर दी है।

शिवराज भी यही सन्देश देना चाहते हैं कि सिर्फ एक हार से वह चुप नहीं बैठने वाले हैं। इस्तीफे के बाद उन्होंने मीडिया से चर्चा में साफ कहा था कि अब हम चौकीदार की भूमिका में हैं और दमदार विपक्ष है, चुप नहीं बैठेंगे। शिवराज लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बने और प्रदेश में बीजेपी के सबसे बड़े नेता भी माने जाते हैं। ऐसी स्तिथि में शिवराज अगर आगे निकलते हैं तो हार के बाद भी लोकसभा चुनाव में कार्यकर्ता जी जान से जुट जाएंगे। हालाँकि तीन राज्यों में हार के बाद बीजेपी के लिए लोकसभा का चुनाव मुश्किल रहने वाला है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी संगठन इस यात्रा के पक्ष में नहीं है. और संगठन ने फिलहाल लोकसभा चुनाव को प्राथमिकता दे रहा है|