22 सीटों पर सिंधिया समर्थकों को ही उतारेगी BJP, उपचुनाव से पहले फूट रहे बगावत के सुर

भोपाल। पूजा खोदाणी।
बीते महिनों कमलनाथ सरकार(kamalnath sarkar) से बगावत कर सिंधिया समर्थक मंत्रियों-विधायकों (Scindia pro ministers-MLAs) ने कॉंग्रेस सरकार (Congress Government) गिरा कर भाजपा की सरकार (bjp Government) बनवा दी थी ,उन पूर्व विधायको (former mla) को उपचुनाव(by election) में बीजेपी के टिकट देने पर चल संशय को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु शर्मा (BJP state president Vishnu Sharma)ने विराम लगा दिया।टेलीफोन एवं वीडियोकॉल के माध्यम से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष 24 में से 22 सीटों पर सिंधिया समर्थक पूर्व विधायको को ही प्रत्याशी बनाने की अघोषित हरी झंडी ने बीजेपी में विरोध का माहौल बना दिया। अंदरूनी खलबली का मसला बढ़ता देख अब वरिष्ठ नेतृत्व अनुशासन का पाठ असन्तुष्ट नेताओ को पढ़ा रहे है। संगठन और हाईकमान लगातार असंतुष्टो को मनाने में जुट गया है, जिसके तहत कॉंग्रेस के बागी विधायको के खिलाफ चुनाव लड़ चुके नेताओ सहित असन्तुष्ट नेताओ से बातचीत की जा रही है।साथ ही सभी को सन्देश दिया गया है कि चुनाव में सभी लोग पार्टी हित में काम करें, इसके बाद सभी मुद्दों पर बात की जायेगी।

दरअसल, कोरोना संकट (Corona crisis)के बीच बीजेपी की उपचुनाव को लेकर तैयारियां जोरों पर है।शुक्रवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत(Organization General Minister Suhas Bhagat) ने 24 सीटों के नेताओं से चर्चा की।सुत्रों की माने तो इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहाष भगत ने कार्यकर्ताओं को बताया कि 24 में से 22 सीट पर सिंधिया समर्थक ही उम्मीदवार होंगे। अघोषित तौर पर बीजेपी के उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया जाएगा।वही स्थानीय नेताओं से दोनों ने अपील की है कि सिंधिया के साथ आए लोगों को जीताना है। साथ ही उन्हें परिस्थितियों से भी अवगत कराया कि उन्हीं की वजह से प्रदेश में सरकार बनी है।

बीजेपी नेताओं में पनपने लगा असंतोष
इधर, वीडी के इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई है। कुछ नेताओं ने इस तरह प्रत्याशियों के नाम घोषित करने की प्रकिया पर सवाल उठाने शुरू कर दिए है।उनका तर्क है कि भाजपा में इस प्रत्याशियों के चयन एवं उनके नाम घोषित करने की एक परम्परा है।जिसका पालन नही किया जा रहा।इस तरह नेताओं में असंतोष पनपने लगा है। हाल ही पूर्व मंत्री दीपक जोशी की बगावत देखने को मिली थी, इसके पहले ग्वालियर चंबल में बीजेपी नेताओं में अंसतोष की खबरे मीडिया में सुर्खिया बनी थी, जिसकी चिंगारी दिल्ली तक भी पहुंची थी। सुत्रों की माने तो सिंधिया और उनके समर्थकों के पार्टी मे आने से बीजेपी में अंतकलह बढ़ गई है, हालांकि संगठन और हाईकमान अंसतुष्टों को मनाने की कवायद में जुटा हुआ है। वहीं इससे भी बड़ी चुनौती भाजपा के लिए ये होगी कि वो इन सभी सीटों पर अपने पूर्व प्रत्याशियों को कैसे मनायेगी और कैसे इस बात के लिए राजी करेगी कि कांग्रेस से आने वाले नेताओं के लिए जनता के लिए वोट मांगे।खास करते इन 22 सीटों में से सवा साल पहले कांग्रेस (congress) के टिकट पर चुनाव जीतकर आए विधायक अब बीजेपी (bjp) की ओर से ताल ठोकेंगे, और ऐसे में उनसे हार चुके बीजेपी के प्रत्याशी उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होंगे।

महाराज के सामने बडी चुनौती
अब महाराज के सामने भी इन 22 को जिताना चुनौती पूर्ण रहेगा। कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थन में पार्टी और विधायकी छोड़ने वाले नेताओं के लिए आने वाला उपचुनाव कड़े संघर्ष वाला होगा, क्योंकि उन्हें कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों भिड़ना होगा। उन्हें मतदाता को विश्वास दिलाना होगा कि उन्होंने जो किया वो जनता के लिए ही किया। वही महाराज को भी अब अपने आप को बीजेपी की तरफ से रिप्रजेंट करना होगा।

कांग्रेस के सवालों पर भी लगा पूर्ण विराम
इधर वीडी के संकेत ने कांग्रेस द्वारा बार बार उठाए जा रहे सवालों पर भी पूर्ण विराम लगा दिया है। असल में, कमलनाथ सरकार के पतन के बाद से ही कांग्रेस सवाल खड़े कर रही थी कि बीजेपी 22  पूर्व विधायकों को टिकट देगी या नही। वही ट्वीटर के माध्यम से यहां तक दावे किए जा रहे थे कि  बीजेपी 22 जयचंदो में से 12 को टिकट नहीं देगी और 10 जयचंदों को ही टिकट देगी, लेकिन उन्हे जीतने नहीं देगी..!इस तरह पूरे 22 निपट जायेंगे।लेकिन इन सभी दावों और सवालों पर बीजेपी ने पूर्ण विराम लगाया दिया है और 24 में से 22 सीटों पर सिंधिया समर्थकों को उतारने का फैसला किया है।

22 में से 10 ऐसे जो पहली बार विधानसभा पहुंचे थे

2018 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले सिंधिया समर्थकों 22 पूर्व विधायकों में से 10 ऐसे हैं जो पहली बार विधानसभा पहुंचे थे इनमें रघुराज कंसाना, कमलेश जतव्, मुन्नालाल गोयल, रक्षा सरोनिया, मनोज चौधरी, जजपाल जज्जी, सुरेश धाकड़, ओपीइस भदौरिया, गिरिराज दंडोटिया और जसवंत जाटव शामिल हैं । जबकि बिसाहू लाल साहू पांचवी बार विधायक चुने गए थे। इसे अलावा महेंद्र सिंह सिसोदिया, रणवीर जाटव, हरदीप सिंह डंग, ब्रजेंद्र सिंह, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी, गोविंद सिंह राजपूत, राजवर्धन सिंह, तुलसी सिलावट और एन्दल सिंह कंसाना में से कोई दो बार, कोई तीन बार और कोई चार बार का विधायक है। लेकिन इन सभी ने सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस छोड़ दी और उनके ही हाथों में अपना राजनैतिक भविष्य सौंप दिया है।

इन सीटों पर होना है चुनाव
बता दे कि एक कांग्रेस बनवारी लाल जौरा विधानसभा और एक बीजेपी मनोहर सिंह ऊंटवाल आगर विधानसभा सीट निधन के बाद सीट खाली हुई है। वही 22 सिंधिया समर्थक दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य के साथ बीजेपी में शामिल हो गए है।सरकार गिराने में इन 22 की भूमिका अहम रही थी।वर्तमान में ग्वालियर-चंबल अंचल की 16 सीटें और 5 मालवा-निमाड़ तथा एक सागर, भोपाल, शहडोल संभाग की हैं। पार्टी का जोर ऐसी सीटों पर ज्यादा है जहां से पूर्व मंत्री लड़े थे और अब वे भाजपा में है।