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भोपाल/राजगढ़। 

लोकसभा चुनाव से पहले बहुजन समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राजगढ़ लोकसभा प्रत्यायशी निशा त्रिपाठी ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। वह अब कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी का समर्न करेंगी। इस खबर के बाद बसपा को बड़ा झटका लगा है। निशा बसपा नेता डॉ ओपी त्रिपाठी की पत्नी हैं। वह टिकट के ऐलान होने के बाद से ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार में जुटी थी। लेकिन अचानक उन्होंने अपना नामांकन वापस लेकर सबको चौंका दिया। इस फैसले से बीजेपी को भी तगड़ा झटका लगा है। 

दरअसल, इस सीट पर बीजेपी वर्तमान सांसद रोडमल नागर को ही उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने उनके खिलाफ  मोना सुस्तानी को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर बीजेपी के वर्तमान सांसद और प्रत्याशी रोडमल के खिलाफ जमकर विरोध हो रहा है। मोना सुस्‍तानी पूर्व विधायक गुलाब सुस्‍तानी की बहू हैं। उन्‍हें दिग्विजय सिंह की करीबी नेता माना जाता है। 2014 में रोडमल नागर को मोदी लहर में 596,727 लाख वोट मिल थे। उनकी जीत का अंतर भी काफी बड़ा था। उन्होंने कांग्रेस के नारायण सिंह को  228,737 मतों से हराया था। जबकि 2009 में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था और नारायण सिंह यहां से सांसद थे। वहीं, बीएसपी उम्मीदवार को इस सीट पर 13 हजार से अधिक वोट मिले थे। लेकिन इस बार मोदी लहर का कोई प्रभाव नहीं हैं। वहीं, बीजेपी में भी रोडमल का विरोध है। कांग्रेस और बसपा के एक साथ आने से अब बीजेपी की राह मुश्किल होती दिखाई दे रही है। 

क्या है इस सीट का इतिहास

लक्ष्मण सिंह ने 1996, 1998, 1999 और 2004 के चुनाव में भी जीत हासिल की. 2004 के चुनाव में सिंह को जीत तो मिली थी, लेकिन उन्होंने इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव पर लड़ा था। इसके अगले चुनाव में भी वह बीजेपी के टिकट पर लड़े और इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के नारायण सिंह ने उन्हें मात दी. इस सीट पर कांग्रेस को 6 बार जीत मिली है और बीजेपी को 3 बार।  ऐसे में देखा जाए तो इस सीट पर कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं। चचौड़ा, ब्यावरा, सारंगपुर, राघोगढ़, राजगढ़, सुसनेर, नरसिंहगढ़ और खिलचीपुर यहां की विधानसभा सीटें हैं। इन 8 सीटों में से 5 पर कांग्रेस और 2 पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि 1 सीट पर निर्दलीय विधायक है।