सिंधिया को हराने वाले केपी यादव पर दर्ज केस बना सियासी झगड़ा

भोपाल| कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को लोकसभा चुनाव में हराने वाले गुना-शिवपुरी से भाजपा सांसद केपी यादव के खिलाफ दर्ज हुआ केस अब सियासी झगड़ा बन गया है| यादव के बचाव में भाजपा मैदान में आ गई है और सरकार पर भाजपा नेताओं को जबरन प्रताड़ित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं| वहीं इसके पलटवार में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 15 साल तक भजपा की सरकार थी, इस दौरान इन्होने कई मामले दबा रखे हैं जो अब सब सामने आ रहे हैं| वहीं केपी यादव के खिलाफ एफआईआर के बाद बीजेपी कार्यकर्ता आक्रामक हो गए हैं सिंधिया के खिलाफ प्रदर्शन कर एफआईआर को निरस्त किए जाने की मांग की कर रहे हैं।  

दरअसल,  क्रीमीलेयर श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र धोखाधड़ी कर बनवाने के आरोप के चलते बीजेपी सांसद यादव और उनके पुत्र सार्थक यादव पर केस दर्ज हुआ है। अशोकनगर में एफआईआर रविवार देर रात 1 बजे मुंगावली कोतवाली पुलिस ने दर्ज की| सोमवार सुबह जैसे ही यह खबर चर्चा में आई राजनीति में उबाल आ गया| वहीं इसी मामले में एफआईआर के बाद अशोकनगर एसपी पंकज कुमावत का तबादला कर दिया गया| बताया जा रहा है कि मामला सामने आने के बाद एफआईआर में देरी पर एसपी पर गाज गिरी है|  इसको लेकर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आरोप लगाया है कि सरकार अधिकारियों को प्रताड़ित कर रही है, ऊपर से भ्रष्टाचार हो रहा है| 

पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक विश्वास सारंग ने इस मामले में सरकार पर हमला बोला है| उन्होंने कहा केपी यादव का सिर्फ इतना दोष था कि उन्होंने एक बड़े नेता को हराया, प्रदेश की कानून व्यवस्था चरमराई हुई है, इस पर तो कोई काम नहीं हो रहा और एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को प्रताड़ित किया जा रहा है, बीजेपी नेताओं को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है| वहीं इसके जवाब में मंत्री पीसी शर्मा ने कहा प्रदेश में 15 साल बीजेपी की सरकार थी, जिसके चलते सब मामले दबे थे, अब जनता का राज है, सीएम कमलनाथ का राज है इसलिए जो फैक्ट्स हैं बाहर आ रहे हैं, और फैक्ट्स में यह हर जगह लिप्त हैं|