मुख्य आयकर आयुक्त की नसीहत, ‘सत्ता के चाटुकार अफसर न भूलें, गॉडफादर की कुर्सी आनी जानी है’

Chief-Commissioner-of-Income-Tax-rk-paliwal-facebook-post-for-officers

भोपाल| सरकार के इशारे पर काम करने वाले अधिकारियों को आयकर विभाग के मुख्य आयकर आयुक्त आरके पालीवाल ने कड़ी नसीहत दी है| पालीवाल ने ऐसे समय यह पोस्ट किया है जब हाल ही में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की साख पर सवाल उठे हैं| जबकि पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने अपने यहां सीबीआई के प्रवेश पर ही रोक लगा दी है। वहीं कई राज्यों में इसकी तैयारी चल रही है| उन्होंने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से लिखा है कि कुछ जनसेवक नियम कायदों को ताक पर रखकर अपने गॉडफादर आकाओं के हिसाब से काम करने लगते हैं और सत्ता बदलते ही कचरे की तरफ फेंक दिए जाते हैं | हमेशा यस सर, यस सर कहने वालों को कभी कभी “नो सर” भी कहना सीखना चाहिए, जैसे उनके पूर्वज कहते थे। 

यह लिखा पोस्ट में 

जनसेवकों से संविधान नीति और नियमों के अनुसार जनसेवी कार्य करने की अपेक्षा करता है।यह एक दुखद सच है कि कुछ जनसेवक नियम कायदों को ताक पर रखकर अपने गॉडफादर आकाओं के हिसाब से काम करने लगते हैं। सत्ता में बैठे गॉडफादर के लिए कुछ भी कर गुजरने वाले अफसर अक्सर भूल जाते हैं कि गॉडफादर की कुर्सी आनी जानी है।सत्ता बदलनेजांच एजेंसियों की पहली गाज ऐसे अफसरों पर ही गिरती है।ज्यादा खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता है क्योंकि दस्तावेजों पर उन्हीं के नाम की चिड़िया बैठती है।  हमेशा यस सर, यस सर कहने वालों को कभी कभी “नो सर” भी कहना सीखना चाहिए, जैसे उनके पूर्वज कहते थे।

संविधान के अनुसार जन सेवकों के लिए जन (और देश) की सेवा ही  सबसे महत्वपूर्ण है।दुर्भाग्य से काफी अफसर अपने सत्ताधारी गॉडफादर के लिए इतने समर्पित हो जाते हैं कि नियम कायदे खूंटी पर टांग देते हैं।वे भूल जाते हैं कि सत्ता बदलने पर जांच एजेंसियों की नजर सबसे पहले उस खूंटी पर ही पड़ती है जिस पर चाटुकार अफसर ने नियम कायदे लटकाए गए थे।वे यह भी भूल जाते हैं कि गॉडफादर की गॉडफ़ादरी स्थायी नही है जबकि अफसरों की नौकरी और जवाबदेही स्थाई है।

आदर्श संवैधानिक स्तिथि तो यह है कि स्थाई ब्यूरोक्रेसी को अस्थाई सत्ता को नियम कायदे बताने चाहिए न कि सत्ता के अनुसार नियम कानूनों की धज्जियाँ उड़ाकर सत्ता के मनचाहे कार्यों को आगे बढ़ाना।इतिहास बहती नदी की तरह है जो समय के साथ खुद को साफ कर लेता है और कचरे को किनारे लगा देता है।चाटुकार अफसर भी देर सवेर कचरे की अवस्था को ही प्राप्त होते हैं।