पाकिस्तान से लौटी गीता पर तेलंगाना के परिवार ने जताया दावा, गीता ने पहचानने से किया इंकार

इंदौर, आकाश धौलपुरे। एक बार फिर पाकिस्तान से भारत लौटी गीता को अपनी बेटी बताने का दावा किया गया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। दरअसल, पाकिस्तान से लौटी गीता के परिवार को ढूंढने के लिये इंदौर की आनंद सर्विस सोसायटी, पुलिस और प्रशासन युद्ध स्तर पर मेहनत कर रहा है। इसी का परिणाम है कि महाराष्ट्र और तेलंगाना से कुल 3 दावे सामने आए हैं जिनमें से एक परिवार शुक्रवार को इंदौर पहुंचा और उनका दावा है कि गीता उनके ही परिवार की बेटी है।

तेलंगाना के तारपल्ली गांव से आये एक परिवार ने बताया कि गीता 15 दिन पहले बासरा गांव में आई थी जिसके बाद सोशल मीडिया से उन्हें जानकारी मिली। उनके परिवार की बेटी का चेहरा भी गीता से मिलता है जो 2002 – 2003 में गुम हो गई थी। तारपल्ली से आये श्याम ने बताया कि वो गीता के पिता के चचेरे भाई हैं। उन्होंने बताया कि गीता को मिलाकर कुल 3 भाई बहन थे जिनमें से भाई नही रहा और उसकी एक बहन है। उनके अनुसार गीता की माँ अब इस दुनिया में नहीं है। तेलंगाना से आये श्याम ने दावा किया कि हमें पूरा विश्वास है कि गीता हमारे परिवार की सदस्य है और उसका असली नाम बुल्ली सरिता है। इधर, गीता ने इस परिवार को पहचानने से इंकार कर दिया और साइन लैंग्वेज के जरिये मूक बधिर सोसायटी के ज्ञानेंद्र पुरोहित को बताया कि वो अपने पिता के चेहरे को अच्छी तरह से पहचानती है और दावा करने वाले परिवार ने जो तस्वीर दिखाई है वो उसके पिता से नही मिल रही है। फिलहाल, तेलंगाना का परिवार अब प्रशासन से मांग कर रहा है की डीएनए जांच करवाएं ताकि उनकी बेटी उन्हें मिल सके।

दरअसल, पाकिस्तान से लौटी गीता अब इंदौर में है और हाल ही में गीता को महाराष्ट्र सहित तेलंगाना के कुछ स्थानों पर ले जाया गया था। इसके बाद कुल 3 परिवारों ने गीता को अपनी गुम हुई बेटी बताया था और इसी के चलते तेलंगाना से एक परिवार इंदौर आया था। इधर, आंनद सर्विस सोसायटी के ज्ञानेन्द्र व मोनिका पुरोहित ने बताया कि अब हम एक बार फिर 27 दिसम्बर को गीता को महाराष्ट्र और तेलंगाना के चिह्नित क्षेत्रों में ले जा रहे हैं ताकि उसे कुछ याद आ सके। उन्होंने बताया कि गीता को उसके परिवार के साथ मिलाने के लक्ष्य के साथ ही उसे आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास भी कर रहे हैं। वहीं आज किये गए दावे को मोनिका पुरोहित ने बिल्कुल करीब बताया है लेकिन गीता के इंकार के चलते उसकी सही पहचान करने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं।