बीजेपी और कांग्रेस में किस के बागी कितने भारी, इन सीटों पर बढ़ी मुश्किलें

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अब सभी राजनीतिक दल प्रचार में जुट गए है। टिकट बंटवारे से खफा प्रत्याशी भी अब कांग्रेस और बीजेपी का खेल बिगाड़ते नजर आ रहे हैं। दोनों दलों के बागियोंं को मनाने का सिलसिला नामांकन के एेन वक्त तक चला। कुछ को पदों की रेवड़ी बांटी गईं लेकिन जिन्हें उनके निर्दलीय जीतने पर विश्वास था वह अपने फैसले पर अडिग रहे। अब देखना होगा कि किस पार्टी के बागी कितने भारी पड़ेंगे। दोनों दलों के करीब 20 से ज्यादा प्रत्याशी निर्दली या फिर किसी और दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। अगर इनको जीत मिली तो बीजेपी और कांग्रेस के सरकार बनाने के समिकरण बिगड़ जाएंगे। आइये जानतें हैं कौन कहां से बागी हुआ और किस के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है। 

भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसलिए उन्होंने भिंड से सपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया। बीजेपी उन्हें मनाने में विफल रही। भिंड विधानसभा क्षेत्र से भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा से दो-दो क्षत्रिय और ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में उतरें हैं। ऐसे में अब इन दलों के उम्मीदवार निर्णायक भूमिका निभाने वाले जैन वोटर को मनाने में जुट गए हैं। कुशवाह का मुकाबला कांग्रेस के रमेश दुबे और बसपा के संजीव सिंह कुशवाह के बीच होगा। 

वहीं, गुना की बमोरी सीट से पूर्व मंत्री  केएल अग्रवाल भी बीजेपी के लिए मुसीबत बन सकते हैं। पार्टी उन्हें मनाने में नाकाम रही। बैरसिया से बीजेपी के लिए पूर्व विधायक ब्रह्मानंद रत्नाकर ने भी मोर्चा खोल दिया है। पुष्पराज गढ़ सीट से पूर्व विधायक सुदामा सिंह, ग्वालियर दक्षिण से पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, बाबूलाल मेवरा, राजकुमार मेव नहीं माने।  वहीं उषा सक्सेना, शाजापुर से बागी जेपी मंडलोई सरीखे कई दिग्गजों ने भाजपा उम्मीदवारों की नींद उड़ा दी है। शाजापुर में भाजपा प्रत्याशी अरुण भीमावद और बागी मंडलोई दोनों ही पाटीदार समाज के होने से वोट बंटेंगे। 

उज्जैन में भी कांग्रेस के लिए बागी खेल बिगाड़ सकते हैं। उज्जैन दक्षिण के कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र वशिष्ठ के खिलाफ दिग्विजय समर्थक बागी जयसिंह दरबार उतरे हैं। वहीं, उज्जैन उत्तर पर कांग्रेस को लंबे समय से जीत का इंतजार है। लेकिन इस बार फिर कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम नहीं होने वाली। इस सीट पर टिकट नहीं मिलने खफा कमलनाथ समर्थक  माया त्रिवेदी ने कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती के सामने मोर्चा खोल दिया है। महिदपुर से कांग्रेस के बागी दिनेश जैन (बोस) मैदान में है। जैन को निर्वाचन अधिकारी ने ट्रैक्टर चलाता हुआ किसान चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिया है। जैन पिछले चुनाव में इस सीट से 51 हजार वोट हासिल कर चुके हैं।

ये हैं कद्दावर बागी

आलीराजपुर जिले की जोबट विधानसभा सीट पर बगावत कर चुके विशाल रावत कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे। वह यहां से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के बड़े बागी नामों में ग्वालियर दक्षिण से बसपा प्रत्याशी साहिब सिंह गुर्जर, राजनगर से पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के पुत्र नितिन चतुर्वेदी, केदार डाबर (दिग्विजय समर्थक) भगवानपुरा से मैदान में है। पंधाना से रूपाली बारे, घोड़ाडोंगरी से पूर्व मंत्री प्रताप सिंह उइके चुनाव लड़ रहे हैं। इन्हें मनाने की कोशिशें बेकार रहीं। कांग्रेस के दूसरे बागी हमीर सिंह राठौर ने पर्चा वापस नहीं लिया है। इस सीट पर बागी होने से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। 

मंदसौर में निर्दलीय फार्म भरने वाले महेंद्र पाटीदार ने अपना नाम वापस ले लिया है, जिसके चलते उन्हें आज ही कांग्रेस में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दे दी गई है। सुसनेर से राणा विक्रम सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। आगर-मालवा से मधु गेहलोत ने नाम वापस नहीं लिया। इनके मैदान में डटे रहने से कांग्रेस से ज्यादा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा। क्योंकि सपाक्स संगठन के वे वाेट उन्हें मिलेंगे जो अब तक भाजपा मिलते हैं।

बुरहानपुर से सुरेंद्र सिंह उर्फ शेरा भैया निर्दलीय मैदान में है जो पार्टी के प्रत्याशी रविंद्र महाजन के लिए मुसीबत पैदा करेंगे। मंदसौर जिले में सुवासरा से कांग्रेस के जिला कार्यवाहक अध्यक्ष व पूर्व जिपं सदस्य ओमसिंह भाटी बागी बन गए। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के कहने के बाद भी फॉर्म वापस नहीं लिया। वे कांग्रेस प्रत्याशी हरदीप सिंह डंग के लिए परेशानी बनेंगे। गरोठ से कांग्रेस नेता व पूर्व जनपद अध्यक्ष तूफानसिंह सिसौदिया ने नामांकन वापस नहीं लिया। पूर्व सांसद नटराजन की सारी कोशिशें विफल रही। वे पूर्व मंत्री व कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष सोजतिया के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।