मप्र में कांग्रेस को जल्द मिल सकता है नया मुखिया, कमलनाथ की पसंद पर लगेगी मुहर

Congress-can-get-new-chief-in-madhya-pradesh-soon-

भोपाल। कांग्रेस अध्यक्ष का फैसला होने के बाद अब मुख्यमंत्री कमलनाथ का प्रदेश कांग्रेस कमेटी चीफ के पद से इस्तीफा कभी भी मंजूर हो सकता है। अगला पीसीसी चीफ भी उनकी पसंद का ही होगा। क्योंकि सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने से कमलनाथ कांग्रेस में और ताकतवर हो गए हैं। हालांकि पीसीसी चीफ कौन होगा, अभी यह तय नहीं है। संभवत: अगस्त के आखिरी में मप्र कांग्रेस को नया मुखिया मिल सकता है। 

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कमलनाथ ने पीसीसी चीफ से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी, लेकिन हाईकमान ने उन्हें अगले पीसीसी चीफ के चयन तक इस पद पर बने रहने के निर्देश दिए। अब चूंकि पार्टी की सीडब्ल्यूसी की बैठक ने राहुल गांधी का इस्तीफा मंजूर कर सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया है। ऐसे में जल्द ही कमलनाथ का इस्तीफा मंजूर होने की संभावना है। कांग्रेस के दिल्ली पदस्थ सूत्रों से खबर है कि जल्द ही हाईकमान प्रदेश इकाईयों को लेकर फैसला ले सकता है। खासकर मप्र के लिए फैसला जल्द होने की संभावना है। क्योंकि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पीसीसी चीफ से कमलनाथ का इस्तीफा मंजूर करने के साथ ही नए पीसीसी चीफ का ऐलान कर सकती हैं। पीसीसी चीफ के लिए मप्र में कई नामों की चर्चा है। जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर अजय सिंह, राजेन्द्र सिंह, उमंग सिंघार, रामनिवास रावत जैसे नेताओं के नाम चर्चा में है। हालांकि इनमें से किसी के नाम के संकेत हाईकमान की ओर से नहीं मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि जल्द ही पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी राज्यों की इकाइयों को लेकर बड़ी बैठक बुलाने जा रही हैं। इस बैठक के बाद नए पीसीसी चीफ के नाम का ऐलान हो जाएगा। 

कमजोर पड़ता सिंधिया खेमा

प्रदेश कांग्रेस में अभी तक सिंधिया खेता सबसे मजबूत हुआ करता है। लेकिन लोकसभा चुनाव हारने के बाद से सिंधिया खेमा लगातार कमजोर होता दिख रहा है। कमलनाथ सरकार में भी सिंधिया खेमे के मंत्रियों की अन्य खेमों के मंत्रियों की अपेक्षा कम चलती है। सोनिया गांधी के पीसीसी चीफ बनने से सिंधिया थोड़े कमजोर पड़े हैं, जबकि कमलनाथ मजबूत हो गए हैं। क्योंकि सिंधिया की जिस तरह से राहुल गांधी के साथ पटरी बैठती थी, अब वैसा तालमेल सोनिया गांधी के साथ नहीं है। इसके आलावा हाल ही में सिंधिया ने जम्म-कश्मीर मसले पर केंद्र सरकार का पक्ष लिया है। जबकि कांग्रेस पार्टी इसका विरोध कर रही है। सिंधिया के कश्मीर को लेकर आए बयान से भी कांग्रेस के भीतर ही विरोधाभास की स्थिति है।