एक महीने तक TV डिबेट में शामिल नहीं होंगे कांग्रेस प्रवक्ता, भिंड प्रत्याशी ने उठाई थी मांग

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भोपाल| लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी पराजय के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला किया है| अगले एक महीने तक पार्टी टीवी चैनलों की डिबेट में अपने प्रवक्ता नहीं भेजेगी| कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी| इससे पहले  चुनाव में हारने के बाद समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी का पक्ष रखने के लिए मनोनित किए गए पैनलिस्टों का मनोयन रद्द कर दिया था। मध्य प्रदेश की भिंड लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी देवाशीष जरारिया ने हार की बाद कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस सम्बन्ध में पत्र लिखा था| 

सुरजेवाल ने आज ट्वीट कर कहा, ”कांग्रेस ने एक महीने के लिए टेलीविजन बहस पर प्रवक्ताओं को नहीं भेजने का फैसला किया है, सभी मीडिया चैनलों/संपादकों से अनुरोध है कि वे अपने शो में कांग्रेस के प्रतिनिधियों को न रखें.” उन्होंने प्रवक्ता को टीवी डिबेट में नहीं भेजने के कारणों का जिक्र नहीं किया है| कांग्रेस ने यह निर्णय ऐसे वक्त में लिया है जब लोकसभा चुनाव में मिली हार पर पार्टी में गहरा मंथन चल रहा है। बीते दिनों यह खबरें भी आती रही हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से नाराज हैं और अपना इस्तीफा देना चाहते हैं।.

देवाशीष जरारिया ने लिखा था पत्र 

 कांग्रेस के युवा नेता और भिंड लोकसभा सीट से कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी देवाशीष जरारिया ने राहुल गांधी को पत्र लिखा था। जरारिया ने पत्र में मीडिया पर एक पक्षीय होने का आरोप लगाते हुए टीवी डिबेट में पार्टी प्रवक्ताओं को प्रतिबंधित करने का की बात कही थी। कांग्रेस नेता का मानना है कि उन्होंने 5 सालों में 600 से ज्यादा नेशनल चैनल की डिबेट्स में हिस्सा लिया है, जिसमें देश के नेशनल मीडिया एकपक्षीय माहौल बनाते है। ऐसे में आने वाले समय को देखते हुए प्रवक्ताओं को टीवी से किनारा करना चाहिए। साथ ही उनके दायित्व को बदलना चाहिए।  देवाशीष जरारिया में लिखा था कि 95% टीवी डिबेट्स सिर्फ भाजपा के प्रोपेगंडा पर आधारित हैं। आज कॉरपोरेट मीडिया पर विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे में कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों को टीवी डिवेट्स में नहीं भेजने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया जैसे माध्यमों को अपनाना चाहिए। उन्होंने प्रवक्ता पद के दायित्व को बदलकर कांग्रेस की विचारधारा को गांव गांव शहर शहर पहुंचाने के लिए कहा था। 

बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा| केंद्र में सरकार बनाने का सपना देख रही कांग्रेस को झटका लगा और बीजेपी ने 303 सीट जीत कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और केंद्र में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है| वहीं कांग्रेस ने 52 सीटों पर जीत दर्ज की है. हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की अपनी परंपरागत अमेठी सीट से हार गए| वह केरल की वायनाड सीट पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे|  

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