कांग्रेस विधायक की दो टूक- सिफारिश आई तो टिकट कटा समझें

जब तक ज्याेतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे ताे ग्वालियर चंबल अंचल में पार्षदी से लेकर सांसद के टिकट वितरण में उनका अहम राेल हाेता था। अधिकांश टिकट सिंधिया के पसंद के लाेगाें काे ही मिलते थे। पार्टी के नेता उनकी पसंद को तबज्जो देते थे

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। नगर निगम चुनाव (Municipal election) की तारीखों की घोषणा भले ही अभी नहीं हुई हो लेकिन कांग्रेस (Congress)  में इसे लेकर अंदरूनी तैयारी शुरू हो गई है। स्थानीय नेता पार्षद (Parshad) का टिकट पाने के लिए बड़े नेता से जुगाड़ फिट करने के प्रयास करने लगे हैं लेकिन ग्वालियर दक्षिण के विधायक ने इस परंपरा को तोड़ने का ऐलान कर दिया है ।

ग्वालियर दक्षिण विधायक प्रवीण पाठक ने चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं से साफ कह  दिया है कि यदि मेरे पास टिकट के लिए किसी बड़े नेता का फ़ोन आया तो वो नेता अपना टिकट कटा समझे, उन्होंने कहा कि अब परिक्रमा से नहीं पराक्रम से टिकट मिलेगा।

दरअसल,  ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के भाजपा (BJP) में जाने के बाद अब ग्वालियर (Gwalior) के कांग्रेस नेताओं ने खुलकर बाेलना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं अब कांग्रेस नेताओं ने परंपरा को बदलना भी शुरू कर दिया है। इसकी शुरूआत की है ग्वालियर दक्षिण विधानसभा के विधायक प्रवीण पाठक (MLA Praveen Pathak)ने ।

फोन आया तो टिकट कटा समझें

विधायक पाठक ने अपने विधानसभा क्षेत्र के नेताओं की बैठक लेकर दो टूक कह दिया कि इस बार पार्षद का टिकट उसे ही मिलेगा जो योग्य होगा और सीट निकालने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि यदि मेरे पास टिकट के लिए किसी बड़े नेता का फोन आया तो वो नेता अपना टिकट कटा समझे। विधायक ने कहा कि अब सिफारिश नहीं चलेगी। परिक्रमा नहीं पराक्रम से टिकट मिलेगा।

पार्षद पद के टिकट के लिए गाइड लाइन तय हैं

विधायक प्रवीण पाठक ने पिछले दिनों पार्टी कार्यालय में दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की बैठक ली। विधायक ने कहा कि पार्षद पद के टिकट के लिए गाइड लाइन तय हैं। इस बार पहले की तरह व्यक्ति विशेष व नेता की सिफारिश पर पार्षद का टिकट नहीं दिया जाएगा। उनका इशारा महल की तरफ था। दरअसल जब तक ज्याेतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे ताे ग्वालियर चंबल अंचल में पार्षदी से लेकर सांसद के टिकट वितरण में उनका अहम राेल हाेता था। अधिकांश टिकट सिंधिया के पसंद के लाेगाें काे ही मिलते थे। पार्टी के नेता उनकी पसंद को तबज्जो देते थे तो जिस नेता की पहुँच महल तक होती थी वो टिकट पा लेता था बाकी मायूस हो जाते थे। इसमें कई बार संगठन में शिकायत भी होती थी कि योग्य उम्मीदवार को नजरअंदाज कर दिया गया लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। विधायक ने सिफारिशी पैमाना खारिज कर दिया है बल्कि ये तक का दिया कि जिसका सिफारिशी फ़ोन आया उस टिकट बिलकुल नहीं मिलेगा।

जीत का दावा कर रहे नेताओं को भी झाड़ा

उन्होंने नेताओं से कहा कि टिकट के लिए ब्लॉक, मंडलम व सेक्टर अध्यक्ष की अनुशंसा अहम होगी। संगठन स्तर पर अनुशंसा किए गए नामों को टिकट के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भेजा जाएगा। इसलिए टिकट की दावेदारी के लिए किसी नेता के दरवाजे पर दस्तक देने की बजाए अपने ब्लॉक, मंडलम व सेक्टर अध्यक्ष के पास विधिवत टिकट के लिए अपना आवेदन दें और उसमें बायोडाटा भी संलग्न करें। उन्होंने बैठक में जीत का दावा करने वाले उन नेताओं से सवाल किया कि जब आप बरसों से अपने वार्ड में रह रहे हो और अब अपनी जीत के दावे कर रहे हो, क्या ये बताओगे कि पिछले कई सांसद और विधायक चुनावों में पार्टी कई पोलिंग आपके वार्ड से हारी तब आप कहाँ थे और अब कैसे जीत जाओगे क्या इसकी वजह बता पाओगे? विधायक के इस सवाल पर नेता बगले झांकने लगे।

एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए विधायक प्रवीण पाठक ने कहा कि ये संगठन को मजबूती देने के प्रयास हैं। पार्टी के लिए समर्पित और क्षेत्र के लिए योग्य व्यक्ति का टिकट सिफारिशी नेता की वजह कट जाता था, नेता बड़े नेताओं की परिक्रमा कर टिकट हासिल कर लेते थे लेकिन कई बार ऐसा होता था कि पार्टी को निराशा मिलती थी इसलिए पार्टी को मजबूत करने और क्षेत्र का विकास करने के उद्देश्य से मैंने ये परंपरा तोड़ने का फैसला लिया है कि अब परिक्रमा से नहीं पराक्रम से टिकट मिलेगा। ब्लॉक, सेक्टर, मंडलम की भूमिका अहम होगी और यदि ब्लॉक, सेक्टर या मंदलम का पदाधिकारी पार्षद का चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे पद से इस्तीफा देकर मैदान में आना होगा और तय गाइड लाइन के हिसाब से आवेदन करना होगा साथ ही भरोसा दिलाना होगा कि वो सीट निकाल कर देंगे।

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