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भोपाल।

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस में जमकर खलबली मची हुई है। छह महिने पहले वनवास काट सत्ता में आई कांग्रेस को मोदी की लहर में तगडा झटका लगा है। पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गज इस लहर में बह गए, जिसके बाद सरकार का अस्तित्व भी खतरे में आ गया है।वही बैठक से एक दिन पहले निर्दलीय विधायक  ठाकुर सुरेंद्र सिंह (शेरा भैया) ने भी जनता कहेगी तो कांग्रेस को नमस्ते देंगें वाले बयान ने भी पार्टी में हड़कंप मचा दिया है।  इसी के चलते मुख्यमंत्री कमलनाथ ने  कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने की गरज से आज 26 मई को भोपाल में विधायकों की बैठक बुलाई है।इसी के साथ कैबिनेट बैठक भी रखी गई है।जिसमें रुके कामों पर चर्चा की जाएगी वही माना जा रहा है कि बैठक में बड़े फैसले हो सकते है।

दोनों बैठकें मुख्यमंत्री निवास पर रविवार को आयोजित की जाएगी। राज्य मंत्रिप���िषद की बैठक सुबह 11 बजे होगी, जिसमें मंत्री लखन घनघोरिया ने बैठक में शामिल नहीं होने के लिए अनुमति मांगी। वहीं कांग्रेस विधायक दल की बैठक शाम चार बजे होगी। इसमें विधायक विशाल पटेल विदेश में होने के कारण अनुपस्थित रहेंगे।दोनों बैठकों में लोकसभा चुनाव के नतीजों की समीक्षा की जाएगी। मंत्रियों से उनके क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों को मिली हार या बढ़त के कम होने का कारण पूछा जाएगा। वहीं, विधायकों से भी ऐसी ही जानकारी लेकर समीक्षा की जाएगी। 

वही विधायक दल की बैठक में विधानसभा के आगामी सत्र की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। लोकसभा चुनाव नतीजों में भाजपा अपनी जीत के बाद सदन में उग्र प्रदर्शन करेगी, जिसके लिए रणनीति बनाई जाएगी। बीजेपी के सरकार गिराने के दावों को लेकर भी सीएम कमलनाथ विधायकों से चर्चा करेंगे। इसके साथ ही 26 को होने वाली कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में कर्जमाफी की समीक्षा होगी। किसानों की कर्जमाफी के साथ सरकार की दूसरी योजनाओं पर भी चर्चा होगी।साथ ही वहीं 27 मई को औपचारिक बैठक में कैबिनेट कई कई प्रस्तावों पर मुहर लगाएगी। 

मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज

 नवंबर 2018 में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल पाया था। 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को 114 जबकि भाजपा को 109 सीटें मिल पायी थी। बहुमत के लिए आवश्यक 116 के आंकड़े को दोनों ही दल नहीं छू पाए थे। तब चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन देने की चिठ्ठी सौंपकर उसकी सरकार बनाने की राह आसान कर दी। कमलनाथ ने चार निर्दलीय विधायकों में से एक को मंत्री बनाया। इसके बाद अन्य विधायकों ने भी मंत्री बनाने की, जिन्हे बाद में आश्वासन दिया गया। सपा और बसपा के साथ कांग्रेस के रिश्ते अभी ठीक नहीं है, ऐसे में इन पार्टियों के विधायकों को भी मंत्री पद देकर खुश किया जा सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। एक चर्चा यह भी है कि कमलनाथ कैबिनेट का नए सिरे से गठन कर सकते हैं। खबर है कि कमलनाथ कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत अन्य 28 मंत्री हैं। इसलिए मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरे ही शामिल किए जा सकते हैं।इनमें छह बार के विधायक केपी सिंह , बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना और राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव, निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर और केदार सिंह डाबर ,बसपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह और रामबाई और सपा से राजेश शुक्ला के नाम चर्चा मे बने हुए है। ये सभी लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रहे है और कई बार अपनी नाराजगी भी जाहिर कर चुके है, इनमे शेरा औऱ रामबाई तो कई बार समर्थन वापस लेने की भी धमकी दे चुके है।

गौरतलब है कि कमलनाथ सरकार के गठन से ही भाजपा निशाना साधती रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा ने प्रचारित किया कि लोकसभा चुनाव बाद कमलनाथ सरकार गिर जाएगी। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने बहुमत साबित करने की मांग करते हुए राज्यपाल को पत्र भी लिख दिया था| नतीजों से पहले इसको लेकर जमकर सियासत गरमाई थी। अब जब नतीजे आ चुके हैं तो कांग्रेस को भय यह है कि भाजपा एक दो माह में उसका गेम बिगाड़ सकती हैं। इस भय की बानगी शुक्रवार को उस समय देखने को मिली जब नीमच के एक कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह डंग के इस्तीफे की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रदेश कांग्रेस एक्टिव हुई और तत्काल उससे संपर्क स्थापित कर खंडन भी वायरल किया गया कि डंग ने इस्तीफा नहीं दिया। डंग इकलौते सिख विधायक है, इस नाते मंत्री बनने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। चूंकि वे नाराज हैं इसलिए जैसे ही उनके इस्तीफे की खबर वायरल हुई कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल दस्ता सक्रिय हो गया है।