ग्वालियर-चंबल के सहारे वापसी की तैयारी में कांग्रेस, सिंधिया समर्थकों को टक्कर देने चर्चा में ये नाम

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ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

ज्योतिरदित्य सिंधिया के साथ गए 22 विधायकों के कारण सत्ता की चाबी गंवाने वाली कांग्रेस उपचुनाव के रास्ते फिर सत्ता पर कब्जा करना चाहती है। उसका मुख्य फोकस ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटें हैं। कांग्रेस इन सीटों पर ऐसे उम्मीदवार तलाश रही है जो पिछली बार कांग्रेस की सीट पर जीत कर गए बागी उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे सकें और इसके लिए पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह के साथ मंथन किया जा रहा है।

ज्योतिरदित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद अंचल में सबसे बड़ा नाम वरिष्ठ विधायक पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह का उभर कर आया है। कभी अंचल में कांग्रेस की राजनीति सिंधिया के इर्द गिर्द घूमती थी जिसकी चाबी अब दिग्विजय समर्थक डॉ गोविंद सिंह के पास है और इसमें उनका साथ निभा रहे हैं वरिष्ठ विधायक केपी सिंह और अपैक्स बैंक के पूर्व चेयरमेन अशोक सिंह। प्रदेश की भाजपा सरकार इस समय कोरोना संकट में व्यस्त है लेकिन कांग्रेस अपने विजयी उम्मीदवार तलाशने में जुटी है।

पिछले दिनों अपने दिल्ली प्रवास के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फोन करके डॉ गोविंद सिंह को शनिवार को भोपाल बुलाया। जानकार सूत्र बताते हैं कि गोविंद सिंह शनिवार को भोपाल पहुंचे, वे पहले दिग्विजय सिंह से मिले यहाँ उन्होंने संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा की फिर वे कमलनाथ से मिले । पूर्व मुख्यमंत्री ने गोविंद सिंह से ऐसे उम्मीदवार के नाम बताने के लेते कहा जो पिछली बार कांग्रेस की सीट पर जीत कर आये उम्मीदवारों को पटखनी दे सकें। यहाँ दोनों केए बीच ग्वालियर चंबल के उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई। दरअसल कमलनाथ चाहते हैं कि अंचल की सभी 22सीटों पर कांग्रेस का ही कब्जा हो और बागियों को सबक मिले। पहले दौर की चर्चा में ग्वालियर चंबल अंचल की कुछ सीटों पर सिंगल नाम निकल कर आये तो कुछ पर दो या दो से अधिक नाम। सूत्रों की बात पर भरोसा करें तो ग्वालियर सीट पर संत कृपाल सिंह महाराज, और सुनील शर्मा के नाम की चर्चा है। सुनील शर्मा प्रद्युम्न सिंह तोमर के विरोधी है पिछली बार भी उनका नाम चर्चा में था लेकिन सिंधिया के हस्तक्षेप के बाद टिकट प्रद्युम्न को मिला। हालांकि सुनील शर्मा भी सिंधिया समर्थक नेता माने जाते थे लेकिन सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने भी कांग्रेस छोड़ दी थी लेकिन सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया। जबकि संत कृपाल सिंह दिग्विजय सिंह के आध्यात्मिक गुरु हैं। वो ठाकुर होने के कारण प्रद्युम्न को टक्कर दे सकते हैं इस क्षेत्र में ठाकुर और ब्राह्मण वोट ही फैसला करते हैं। ग्वालियर पूर्व विधानसभा से कांग्रेस अशोक सिंह या ब्रजेंद्र तिवारी को उतार सकती है। पोहरी से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत और हरिवल्लभ शुक्ला का नाम चर्चा में है। वहीं मुरैना से राकेश मावई, दिनेश गुर्जर, और परसराम मुदगल में से कोई उम्मीदवार हो सकता है। सुमावली से मानवेंद्र सिंह गांधी , दिमनी से रवींद्र सिंह का, अंबाह से सत्यप्रकाश सखवार, अशोकनगर से अनीता दोहरे, डबरा से सत्यप्रकाशी परसेडिया और बमौरी से कन्हैया लाल अग्रवाल के नाम की चर्चा है। उधर गोहद से रामनरेश हिंडोलिया, सेवाराम जाटव, राजकुमार देशलहरिया में से कोई उम्मीदवार संभव है। कांग्रेस राज्य सभा परिणाम को देखने के बाद फूल सिंह बरैया को भांडेर से प्रत्याशी बना सकती है उधर मेहगांव सीट पर चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और राहुल भदौरिया के नाम पर चर्चा है। लेकिन पार्टी में चौधरी राकेश सिंह को लेकर एक राय नहीं है। यहाँ भी ब्राह्मण और ठाकुर वोट ही निर्णायक होते हैं। कमलनाथ के साथ गोविंद सिंह की पहली चर्चा में जौरा, करैरा और मुंगावली सीटों पर चर्चा नहीं हुई । हालांकि पूर्व विधायक बनवारी लाल शर्मा के निधन से खाली हुई करैरा सीट पर पार्टी उन्हीं के परिवार का व्यक्ति उतार सकती है जो सेम्पथी लहर में जीत हासिल कर सकेगा

वोट का हिसाब मांगेगी और दलबदल को मुख्य मुद्दा बनायेगी कांग्रेस

24सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस रणनीति बनाने में लगी है। उसका फोकस उन 22सीटों पर अधिक है जो सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ दिग्विजय सिंह सभी बड़े नेता अपनी सरकार की सवा साल की उपलब्धियों के साथ मैदान में उतरेंगे लेकिन 22 विधानसभा में जनता के बीच जाकर उससे कहेंगे वो पिछले विधायक से अपने वोट का हिसाब मांगे जो उसने कांग्रेस के नाम पर दिया था। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस यहाँ दलबदल को भी मुख्य मुद्दा बनायेगी और जनता को बताएगी कि जिनको आपने अपना वोट दिया वो धोखे बाज निकले और आपके वोट का अपमान कर दूसरी पार्टी में चले गए। बहरहाल अंचल की सभी 22 सीटों पर जीत का दावा कांग्रेस का सच होता है या सिंधिया समर्थकों का ये तो समय हो बताएगा। लेकिन ये उपचुनाव सिंधिया की राजनीति की दिशा और दशा जरूर तय कर देंगे।