लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पर संकट, कार्यकर्ताओं ने बनाई संगठन से दूरी

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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने में कामयाब हुई कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। लेकिन पार्टी नेताओं की आपसी खींचतान के चलते उसके सितारे गर्दिश में नजर आ रहे हैं। वक्त है बदलाव का नारे के साथ सत्ता में आई कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए आपसी समन्वय बैठाने की कोशिश कर रही है, लेकिन प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के साथ प्रदेश के नेताओं की तालमेल नहीं बैठ रही। लोकसभा चुनाव में महज 90 दिन का समय बचा है ऐसे में अगर पार्टी ने अंदर खेमे बाजी खत्म नहीं हुई तो इसका बड़ा खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। 

दरअसल, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार मध्य प्रदेश में 20 से अधिक सीटों जीतने का लक्ष्य तय किया है। लेकिन प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया और कांग्रेस नेताओं के बीच पटरी नहीं बैठ रही है। अगर ऐसा ही रहा तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 20 का आंकड़ा तो दूर कुछ सीटों पर ही सिमट सकती है। विधानसभा चुनाव में गर्मजोशी के साथ भाजपा का सामना करने और कांग्रेस को जीत की कगार पर पहुंचाने वाले कार्यकर्ता प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के साथ काम करना नहीं चाहते। सूत्रों के मुताबिक कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि बावरिया का व्यवहार कार्यकर्ताओं के प्रति बेहद अपमानजनक है। इसलिए कार्यकर्ताओं में गुस्सा व्याप्त है। यही नहीं, हाल ही में बावरिया ने बयान दिया था कि लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें इस पद से कोई नहीं हटा सकता। इससे प्रदेश के कार्यकर्ताओंं में बुरा संदेश गया जिसने उनमें आक्रोश पैदा कर दिया। 

मुख्यमंत्री कमलनाथ को कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की जिम्मेदारी दी थी। उनकी वजह से ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं में बिखराव होने से थम गया। लेकिन अब कार्यकर्ता दीपक बावरिया के साथ काम करने के मूड में नहीं है। यही कारण है उन्होंने पार्टी संगठन से लोकसभा चुनाव से पहले ही दूरी बनाना शुरू कर दी है। विधानसभा चुनाव के दौरान दीपक बावरिया के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ मतभेद हुए थे। दोनों ही नेताओं ने बावरिया के व्यवहार के बारे में शिकायत भी की थी। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह उस समय शांत रहे। 

कांग्रेस दीपक बावरिया के उस बयान से भी खफा हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव में हारे हुए उम्मीदवारों को पार्टी लोकसभ चुनाव में टिकट देने पर विचार नहीं करेगी। सिंह और यादव के अलावा, रामनिवास रावत, मुकेश नायक और सुंदरलाल तिवारी जैसे नेता भी लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए दावा कर रहे हैं। 

यहां रहा है विवादों से नाता

विधानसभा चुनावों के दौरान रीवा में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विवाद, कांग्रेस को विंध्य क्षेत्र में भारी हार का सामना करना पड़ा, क्योंकि कमलनाथ और सिंधिया दोनों को सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया। विदिशा में चुनाव के दौरान पदाधिकारियों को हटा दिया गया, जिसके कारण कई सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा- हाल ही में विदिशा के विधायक शशांक भार्गव द्वारा उठाए गए एक मुद्दे ने कांग्रेस नेताओं में सुरेंद्र चौधरी को डिप्टी सीएम के रूप में नियुक्त करने पर नाराजगी जताई।