विदिशा में बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें, पूर्व मंत्री ने ठोकी ताल, आज भर सकते है निर्दलीय नामांकन

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विदिशा।

एमपी मे कांग्रेस ने सभी 29  सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। लेकिन विरोध के स्वर अब भी कम नही हुए है। नेता लगातार बगातर पर उतर रहे है और निर्दलीय चुनाव लड़ने की ताल ठोंक रहे है।अब पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल के निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात सामने आ रही है। खबर है कि पटेल विदिशा लोकसभा सीट से निद्लीय मैदान में उतरने वाले है। इसके लिए वे आज रायसेन जाकर अपना नामांकन दाखिल करेंगें। वही इस खबर से कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। चुंकी अगर पटेल मैदान में उतरे तो जमकर वोटों का बिखराव होगा और 2009 -2014  की तरह फिर इसका फायदा बीजेपी को मिल जाएगा।

आपको बता दे कि राजकुमार पटेल वही है जिनका  2009 में फॉर्म तकनीकी कारणों से निरस्त हो गया था, इसलिए कांग्रेस की ओर से मैदान में कोई प्रत्याशी नहीं बचा। फॉर्म रिजेक्ट होने पर राजकुमार पटेल पर कई सवाल भी खड़े हुए थे। आयोग द्वारा जमा फॉर्म में बी फॉर्म को ओरिजनल न होना बताकर पर्चा निरस्त कर दिया गया था।इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने पटेल को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।हालांकि 2014  में पटेल ने पार्टी में वापसी भी कर ली थी।जिसके बाद यह माना जा रहा था कि कांग्रेस उन्हें प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतारेगी लेकिन पार्टी ने सबकों चौंकाते हुए टिकट हाल ही में इछावर से विधानसभा चुनाव हारे शैलेन्द्र पटेल को दे दिया गया। जिसके बाद से ही पटेल के  निर्दलीय चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गई थी।खबर है कि पटेल अपने खोए हुए सम्मान और कांग्रेस से अपना अधिकार मांगने के चलते आज सोमवार को विदिशा लोकसभा सीट के लिए रायसेन से नामांकन दाखिल कर सकते है। पटेल दिग्विजय समर्थक माने जाते है और कांग्रेस नेत्री विभा पटेल के भाई है।वही इस पूरे घटनाक्रम से कांग्रेस में खलबली मच गई है।कांग्रेस नेता लगातार पटेल को मनाने मे जुटे हुए है, उम्मीद है कि पिछली बार की तरह वे इस बार भी पटेल को मनाने में कामयाब होंगें।

2004  में भी भर दिया था नामांकन

बताया जाता है कि जब निष्कासन समाप्त नहीं हुआ था तो उन्होंने विदिशा संसदीय सीट से निर्दलीय के तौर पर नामांकन पर्चा भी दाखिल किया था।हालांकि बाद में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से आए संदेश के आधार पर उन्होंने नाम वापस ले लिया।इसके बाद  करीब पांच साल बाद उनकी पार्टी में वापसी हो गई थी।पटेल ने लंबे संघर्ष के बाद 2014 के चुनाव में फिर पार्टी में अपनी जगह बनाई ।

सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी अपनी लड़ाई

खास बात ये रही कि पर्चा निरस्त होने के बाद भी  उन्होंने हार नही मानी और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।  कोर्ट में उन्होंने प्रमाण के साथ यह बात रखी थी कि तय समय सीमा में उन्होंने अपना बी फॉर्म जमा कर दिया था लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने उनका पक्ष नहीं सुना और फॉर्म को रिजेक्ट कर दिया। 

विदिशा में शैलेन्द्र का रमाकांत से मुकाबला

कांग्रसे ने यहां से शैलेन्द्र पटेल को मैदान में उतारा है।पटेल स्थानीय प्रत्याशी है वही बीजेपी ने  मार्कफेड के पूर्व अध्यक्ष एवं सहकारिता नेता और पूर्व सीएम शिवराज के समर्थक रमाकांत भार्गव को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने जिस प्रकार विदिशा क्षेत्र से स्थानीय प्रत्याशी शैलेंद्र पटेल पर दांव लगाया है, उसी प्रकार अब भाजपा ने भी स्थानीय प्रत्याशी का ट्रंप कार्ड खेला है। खास बात तो ये है कि पटेल सीहोर जिले की इछावर विधानसभा से हैं वहीं भार्गव भी सीहोर जिले से। इछावर के विधायक रहे शैलेंद्र पटेल वरिष्‍ठ नेता सुरेश पचौरी के करीबी हैं ।वही रमाकांत शिवराज के बड़े समर्थक माने जाते है।पटेल वहां खाती कुर्मी समाज के हैं। सीहोर जिले में इछावर, बुधनी और देवास जिले में खातेगांव विधानसभा क्षेत्र में इनकी संख्या बहुतायत में है। इसके अलावा रायसेन जिले में सांची, भोजपुर और सिलव��नी तथा विदिशा जिले में विदिशा और गंजबासौदा विधानसभा क्षेत्रों में खाती-कुर्मी यानी पिछड़े वर्ग के मतदाता बड़ी संख्या में हैं भार्गव भाजपा सरकार में अपेक्स बैंक के अध्यक्ष रहे हैं। वे भाजपा के विभिन्न पदों पर रहे। जिला सहकारी बैंक सीहोर के अध्यक्ष पद पर 27 दिसंबर 2003 से 4 मई 2011 तक रहे हैं। भाजपा शासन द्वारा उन्हें मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ की जिम्मेदारी सौंपी और वे 24 अप्रैल 2007 से 15 अक्टूबर 2007 एवं 1 जनवरी 2008 से 20 मार्च 2018 तक अध्यक्ष रहे साथ ही 2018 में लगभग 9 माह तक अपेक्स बैंक के प्रशासक का दायित्व भी निभाया।