महाराष्ट्र के सियासी उलटफेर पर बोले दिग्गी- ‘मोदी है तो सबकुछ मुमकिन..पाप का घड़ा फूट कर रहेगा’

भोपाल।

महाराष्ट्र में हुए अचानक उलटफेर के बाद सियासी गलियारों में जमकर हलचल मची हुई है।बयानबाजी के दौर ने रफ्तार पकड़ ली है, एक के बाद एक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है।वही एमपी में भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो चला है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पॉलिटिकल रिएक्शन्स की झड़ी लग गई है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीटर के माध्यम से राज्यपाल पर कई सवाल दाग दिए है और बीजेपी को जमकर आड़े हाथों लिया है।दिग्विजय ने एक के बाद एक चार ट्वीट किए है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के ना खाउंगा और ना खाने दूंगा नारे का भी जिक्र किया है, साथ ही माना है कि मोदी है तो सबकुछ मुमकिन है।

दरअसल, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने महाराष्ट्र में हुए फेरबदल पर पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता को चुनावी नारा दिया था ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’। अब उनका नारा है खूब खाओ और खूब खा कर खिला कर भाजपा में आ जाओ और ईडी, सीबीआई और आईटी से मुक्ति पाओ। इसके पहले दिग्विजय सिंह ट्वीट कर महाराष्ट्र के राज्यपाल पर सवाल उठाए थे, कुछ देर बाद उन्होंने अपने सवालों को वापस ले लिया। इसमें उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल ने संविधान के अनुसार काम नहीं किया, यह पहली बार नहीं है, ऐसा गोवा, मणिपुर, मेघायल और अब महाराष्ट्र में हुआ है। 

पहले ट्वीट में दिग्विजय ने लिखा है कि मोदी जी जनता को चुनावी नारा  “ना खाउंगा ना खाने दूँगा” अब प्रधान मंत्री मोदी जी का नारा है  “ख़ूब खाओ और ख़ूब खा कर खिला कर भाजपा में आ जाओ ED CBI IT से मुक्ति पाओ “ “क्यों कि मोदी है तो सब कुछ मुमकिन है”पाप का घड़ा फूट कर रहेगा।

दूसरे ट्वीट मे लिखा है कि महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल महोदय से मेरे कुछ बुनियादी प्रश्न हैं 

१- क्या राज्यपाल जी को NCP द्वारा समर्थन का कोई पत्र मिला है? 

२- सामान्य रूप से राज्यपाल जी को  NCP के अध्यक्ष जयंत पाटिल का विधायकों के हस्ताक्षरित सहित पत्र मिलने के बाद ही शपथ के लिए आमंत्रित करना चाहिए था।

३- यदि नहीं किया है तो क्या महामहिम  राज्यपाल जी ने संविधान का उल्लंघन नहीं किया है?

तीसरे ट्वीट में लिखा है कि शिव सेना  NCP और कॉंग्रेस को अपनी ताक़त ज़मीन पर दिखा कर सड़कों पर उतरना चाहिये। देखते हैं मुंबई और महाराष्ट्र की जनता किस के साथ है? तीनों पार्टियों के लिये यह अस्तित्व का सवाल है। विशेष कर उद्धव और ठाकरे परिवार के लिये यह प्रतिष्ठा का प्रश्न है।

चौथे ट्वीट में लिखा है कि संयोग से माननीय CJI भी महाराष्ट्र के हैं महाराष्ट्र के Advocate General रहे हैं,  क्या उनके रहते हुए यदि उनके समक्ष सप्रीम कोर्ट में यह संविधान उल्लंघन का प्रकरण आता है तो क्या वे अपना संविधान की शपथ का धर्म निभाएँगे? मुझे विश्वास है वे निभाएँगे।

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