लोकसभा चुनाव के लिए दिग्विजय तैयार, बोले- ‘पार्टी जहां से कहेगी वहां से लड़ूंगा’

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इंदौर| मध्य प्रदेश में 15 का साल का सत्ता का वनवास ख़त्म कराने में बड़ी भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अब लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं| वे खुद भी मैदान में उतरने को तैयार हैं| तीन दशक से भाजपा के कब्जे में रहने वाली इंदौर सीट से दिग्विजय चुनाव लड़ने को तैयार है| दिग्विजय का कहना है कि वो इंदौर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, पार्टी जहां से कहेगी वहाँ से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, शुक्रवार को इंदौर पहुंचे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि संगठन जहां से कहेगा मैं चुनाव लडूंगा।

दरअसल, इंदौर भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है| तीस साल से लोकसभा चुनाव में हर बार यहां कमल खिलता रहा है| 1989 से इस सीट पर लगातार सुमीत्रा महाजन जीतती आ रही है। कांग्रेस यहां तीन दशक से जीत का स्वाद नहीं चख पाई है| लेकिन इस बार पार्टी विधानसभा चुनाव की जीत के बाद उत्साहित है और किसी भी सीट पर वॉकओवर नहीं देने के मूड में है| जिसके चलते चर्चा है कि पार्टी अपने बड़े नेताओं में से किसी को यहां से उतार सकती है, जिसमे दिग्विजय का नाम भी चर्चा में आ गया है| शुक्रवार को दिग्विजयसिंह ने रेसीडेंसी कोठी में पत्रकारों से चर्चा की| इस दौरान सिंह से जब पूछा गया कि क्या वे इंदौर से चुनाव लड़ेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि संगठन कहेगा तो लड़ूंगा, नहीं कहेगा तो नहीं लडूंगा। पार्टी जहां से भी लड़ाएगी। मैं लड़ने को तैयार हूं।  कैबिनेट मंत्री उमंग सिंगार के मामले में उन्होंने कहा कि वह उन्हें अपना जवाब भेज चुके हैं। सिंह ने कहा कि मैंने जयवर्धन को भी समझाया है। वहीं, उज्जैन में मीडिया के पाकिस्तान का पानी बंद करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी बातें कही जाती हैं, पर इंटरनेशनल एग्रीमेंट है, इतनी आसानी से कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के राजकुमार के साथ प्रधानमंत्री ने साझा बयान हस्ताक्षर किया उसमें आतंकवाद से लड़ने की बात तो है, लेकिन पुलवामा अटैक का उल्लेख नहीं है। उस बयान में ही पड़ोसी से चर्चा की बात लिखी है। यदि सरकार ही चर्चा की बात कह रही है तो मैच खेलने से मना कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस गंभीर आतंकी हमले पर प्रधानमंत्री मोदी ने जैसा रिएक्ट किया उसमें मैं निराश हूं। उसी दिन कैबिनेट और आंतरिक सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई जानी थी जो नहीं बुलाई गई।

2003 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने विधानसभा चुनाव हारने के बाद 10 साल तक चुनाव न लड़ने की प्रतिज्ञा की थी| इसके तहत वे 15 साल तक चुनाव नहीं लड़े|अब कांग्रेस उन्हें फिर से लोकसभा में मैदान में उतारना चाह रही है| पिछले दिनों राजगढ़ में भी उन्होंने चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे| जिसके बाद अब उन्होंने इंदौर से चुनाव लड़ने के लिए हामी भर दी है| हालाँकि फैसला पार्टी हाई कमान करेगा| विधानसभा चुनाव के दौरान भी दिग्विजय के चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे थे| तब उन्होंने कहा था वह किसी भी पद की लालसा नहीं रखते हैं, उनका एक ही लक्ष्य है प्रदेश में सरकार बनवाना| अब जब प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता वापसी हो चुकी है और कमलनाथ मंत्रिमंडल में उनके बेटे को जगह मिल गई है तो संभावना है कि दिग्विजय अब लोकसभा चुनाव में उतर सकते हैं| भाजपा के गढ़ में कांग्रेस दिग्विजय को उतार सकती है| 

 1989 से जीतती आ रही है ताई 

इंदौर सीट भाजपा का गढ़ है| 1989 में सुमित्रा महाजन ने यहां से पहला चुनाव लड़ा और फिर क्या था उसके बाद से तो यह सीट उन्हीं की हो गई| 1989 से लगातार वो यहां से सांसद हैं| 2014 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 4 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था| सुमित्रा महाजन ने 1989 के चुनाव में कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हराया| बता दें सुमित्रा महाजन इससे पहले इंदौर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी थीं| कांग्रेस ने उनको हराने की हर कोशिश की, लेकिन उसकी सारी कोशिश नाकाम ही साबित हुई| ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन 8 बार से इंदौर की सांसद हैं| सुमित्रा इससे पहले 1982-85 में इंदौर महापालिका में पार्षद रह चुकीं हैं|