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भोपाल। व्यापमं घोटाले के आरोपियों को सीबीआई द्वारा क्लीनचिट मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्वीट के जरिए लिखा है कि क्या जांचकर्ता और आरोपी एक ही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं। इतना बड़ा घोटाला, इतनी सारी मौंते और दोषी कोई नहीं। मप्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। दिग्विजय के ट्वीट पर सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि मप्र में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पहली बार उन्होंने व्यापमं को लेकर मुंह खेाला है। 

दिग्विजय ने ट्वीटर पर लिखा कि क्या जांचकर्ता और आरोपी एक ही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं। इतना बड़ा घोटाला, इतनी सारी मौतें और दोषी कोई नहीं? उल्टा पैसा देकर भविष्य बनाने का सपना देखने वाले कठघरे में हैं? एमपी सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। यहां बता दें कि सीबीआई ने वन आरक्षक की भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, कांग्रेस नेता संजीव सक्सेना समेत करीब दो दर्जन आरोपियों को क्लीनचिट दे दी है। जांच में सीबीआई को इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। 

सीबीआई ने इन्हें दी क्लीनचिट 

वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 घोटाले मामले में सीबीआई ने पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा उनके ओएसडी ओपी शुक्ला सहित 24 लोगों को आरोपित नहीं बनाया है। पूर्व राज्यपाल के ओएसडी धनराज यादव, अजय सिंह पवार, तरंग शर्मा, व्यापमं के पूर्व नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, कांग्रेस नेता संजीव सक्सेना,राघवेन्द्र तोमर, रामनरेश, अजय शंकर, प्रहलाद सिंह, अजय श्रीवास्तव, दिलीप गुप्ता, सहित 24 लोगों को लेकर विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश की है। सीबीआई ने सभी 24 लोगों के खिलाफ मामले में सबूत न पाते हुए उन्हें वनरक्षक घोटाले में आरोपित नहीं बनाया है। अदालत ने सीबीआई द्वारा पेश क्लोजर रिपोर्ट में अभी संज्ञान नहीं लिया है इसलिए इसमें अदालत की मोहर लगना शेष है।

सीबीआई के चालान में 21 नए नाम

विशेष न्यायाधीश सुरेश सिंह की अदालत में मंगलवार को सीबीआई डीएसपी आशीष प्रसाद ने 90 आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, षडयंत्र, आईटी एक्ट, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मध्यप्रदेश विशेष परीक्षा अधिनियम में तहत चालान पेश किया। सीबीआई के वकील सतीश दिनकर के अनुसार करीब 10 हजार पन्नों के चालान में 247 पन्नों का आरोप पत्र संलग्न किया गया है। आरोप पत्र में चालान के साथ 166 गवाहों की सूची पेश की गई है। मामले में व्यापमं के तत्कालीन कंप्यूटर एनालिस्ट नितिन मोहिन्द्रा, चंद्रकांत मिश्रा, सुधीर शर्मा, भरत मिश्रा, सुधीर गुर्जर, गजेन्द्र सिंह ठाकुर, संतोष सिंह तोमर दलाल व शेष अभ्यर्थी हैं।

दिग्गी का सवाल, इतना बड़ा घोटाला, इतनी मौतें और दोषी कोई नहीं.?