दिग्विजय सिंह

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (digvijay singh) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (cm shivraj singh chouhan) को एक पत्र लिखा है और पत्र के माध्यम से प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संबंधित परीक्षा को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं। सीहोर जिले का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा है कि बेरोजगार युवाओं ने एक और व्यापम कांड (vyapam) घटित होने की आशंका व्यक्त की है और संपूर्ण परीक्षा की एसआईटी गठित कर जांच कराने की भी मांग की है। दिग्विजय सिंह ने पत्र में लिखा है –

प्रिय श्री शिवराज सिंह चौहान जी,

आपके गृह जिले सीहोर में स्थित कृषि महाविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रों का आवेदन पत्र संलग्न प्रेषित है। जिसमें ‘‘पी.ई.बी.’’ द्वारा कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संबंधित परीक्षा को लेकर प्रश्न खड़े किये हैं। इन बेरोजगार युवाओं ने एक ओर व्यापम कांड घटित होने की आशंका व्यक्त की है। आवेदकों ने सम्पूर्ण परीक्षा की एस.आई.टी. गठित कर जांच कराने की मांग की है।

आपको विदित है कि मध्यप्रदेश के घटित व्यापम कांड ने देश-प्रदेश नहीं पूरी दुनिया में मध्यप्रदेश को कलंकित किया था। किस तरह शीर्ष स्तर से अधिकारियों और राजनेताओं ने व्यापम की परीक्षा में आपराधिक गड़बडि़याँ कर करोड़ों, अरबों रूपयों का घोटाला किया था। आज भी सी.बी.आई. से लेकर राज्य पुलिस की एजेंसियाँ वर्षों से जांच कर रही हैं। सैकड़ों लोगों पर मेडिकल काॅलेज में प्रवेश से लेकर आरक्षक भर्ती तक की परीक्षाओं में फेरबदल करने के मामले थानों में दर्ज हैं। अनेक लोगों को सजा हो चुकी है। बहुत से जमानतोें पर घूम रहे हैं।

पीड़ित छात्रों के अनुसार कृषि विश्वविद्यालयों से बी.एस.सी. और एम.एस.सी. करने वाले बेरोजगार युवाओं को लम्बा इंतजार करने के बाद कृषि विभाग के एस.ए.डी.ओ. और आर.ए.ई.ओ. के पदों पर चयन हेतु परीक्षा देने का अवसर मिला था। व्यापम नाम से बदनाम सरकार ने ‘‘व्यापम’’ की जगह बदले नाम पी.ई.बी. (प्रोफेश्नल एक्जामिनेशन बोर्ड) के माध्यम से परीक्षाएँ आयोजित करने का सिलसिला जारी रखा है। व्यापम के बाद पी.ई.बी. के कारनामे जनचर्चा में जगह बनाते जा रहे हैं। नौकरी माफिया से जुड़े लोगों के कारण हर परीक्षा संदिग्ध हो रही है।

अभी पी.ई.बी. ने कृषि विभाग के कार्यपालिक पदों के लिये आयोजित परीक्षा का अधिकृत परिणाम घोषित नहीं किया है पर दस दिन पूर्व 10 से 11 फरवरी को प्रदेश के विभिन्न शहरों में आयोजित परीक्षा में प्राप्त नंबर पी.ई.बी. ने परीक्षार्थिओं को ऑनलाइन बता दिये है। इन पदों के लिये पी.ई.बी. ने दो पेपर्स लिये थे। एक कृषि विभाग और दूसरा पेपर सी-सेट का था। इन पेपर्स के होते ही पी.ई.बी. के ऑनलाइन माध्यम से जब परीक्षा देने वालों को नंबर पता चले तो गड़बड़ी की आशंकाएँ सरगर्म हो गई।

आवेदक छात्रों के मुताबिक स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं में औसत नंबर लाने वाले तथा कई सालों तक फेल होने के बाद बमुश्किल स्नातक करने वाले छात्रों को 200 नंबर में से 190 से 198 नंबर प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है। शिकायत करने वाले छात्रों का कहना है कि पेपर्स इतने आसान नहीं थे कि कालेज में हर साल औसत नंबर से पास होने वाले छात्रों को 100 में से 95, 96, 97, 98, और 99 नंबर मिल सकें।

महिनों परीक्षा की तैयारी और कोचिंग करने वाले छात्र बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने, लाखों रूपये में बेचे जाने तथा हेराफेरी और अनियमितता किये जाने का शक जाहिर कर रहे हैं। आवेदकों का तर्क है कि काॅलेज में मेरिट में आने वाले छात्रों को भी 100 में से 95, 98 नंबर नहीं मिल सकते है। बहुत असाधारण योग्यता होने पर भी ऐसे नंबर लाना मुश्किल होता है। इसी आधार पर छात्र ऐसे परीक्षा केन्द्रों में की गई गड़बडि़यों की जांच की मांग कर रहे है। छात्रों का कहना है कि कुख्यात व्यापम से लेकर ‘‘पी.ई.बी.’’ की अन्य परीक्षाओं में भी आवेदक कभी भी 98 और 99 प्रतिशत् नंबर नहीं ला सके हैं। इसीलिये संदिग्ध परीक्षा केन्द्रों से परीक्षा में शामिल होकर लगभग शत् प्रतिशत नंबर के पास पहुँचने वाले छात्रों की परीक्षा की जांच कराई जानी चाहिये।

‘‘पी.ई.बी. परीक्षा के नये कांड’’ से आशंकित छात्रों ने मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश शासन को संबोधित एक ज्ञापन सीहोर कलेक्टर को 17 फरवरी को सौंपा है। प्रदेश में आगामी अप्रैल माह में 12 लाख बेरोजगार युवा पुलिस आरक्षक की परीक्षा में बैठने जा रहे हैं। ऐसे मामलों के सामने आने से उनका सरकार के प्रति विश्वास क्षीण होगा, साथ ही राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता भी लाखों बेरोजगारों में संदिग्ध होगी।

मेरा आपसे अनुरोध है कि प्रदेश को पूर्व में ‘‘व्यापम कांड़ों’’ से लगी कालिख से सचेत होते हुए कृषि विभाग के एस.ए.डी.ओ. और आर.ए.ई.ओ. के पदों के लिये पी.ई.बी. द्वारा आयोजित परीक्षा में हुई गड़बडि़यों की एस.आई.टी. गठित उच्चस्तरीय गहन जांच कराई तथा पेपर्स लीक होने की जांच में तथ्य सामने आने पर सम्पूर्ण परीक्षा निरस्त की जाये। जांच उपरांत पेपर्स लीक करने वालों पर एफ.आई.आर. दर्ज की जानी चाहिये।

सादर,                                                                                       आपका (दिग्विजय सिंह)