ओ री सखी मंगल गाओ री…कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता ने 4 शावकों को जन्म दिया

ओ री सखी मंगल गाओ री…कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता ने 4 शावकों को जन्म दिया

Female cheetah gives birth to 4 cubs in Kuno National Park : कूनो नेशनल पार्क से गुड न्यूज़ आई है। मादा चीता ने 4 शावकों को जन्म दिया है। एमपी ब्रेकिंग न्यूज के साथ बातचीत में कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ प्रकाश वर्मा ने बताया कि सियाया (Siyaya) नाम की चीता ने 4 शावकों को जन्म किया है। चारों शावक और मां पूरी तरह स्वस्थ हैं।

दो दिन पहले ही कूनो से मादा चीता ‘साशा’ की मौत की खबर ने सभी को दुखी कर दिया था। लेकिन कहते हैं न..हर रात के बाद सुबह होती है और हर पतझड़ के बाद बसंत आता है। साशा की कमी तो पूरी हो नहीं सकती, लेकिन इन चार नन्हें मेहमानों के आने से कूनो में नई बहार जरूर आ गई है। चारों शावकों के जन्म पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट करते हुए कहा है कि ‘अमृत ​​काल के दौरान हमारे वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना! मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 17 सितंबर 2022 को भारत लाए गए चीतों में से एक के चार शावकों का जन्म हुआ है।’ सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी इस मौके पर प्रसन्नता जताई है।

बता दें कि मादा चीता का गर्भकाल 90 से 95 दिन तक होता है। वो एक बार में तीन से लेकर पांच बच्चों को जन्म दे सकती है। जानकारी के मुताबिक जन्म के समय एक शावक का औसत वजन करीब 150 से 300 ग्राम के बीच होता है और वो जन्म के बाद पूरी तरह अपनी मां पर ही निर्भर होते हैं। हालांकि वो तेजी से विकसित होते हैं और दस दिन के अंदर उनकी आंखें खुल जाती है। करीब तीन सप्ताह के होते होते उनके दांत और मंसूढ़े निकल जाते हैं। इस तरह तेजी से उनका विकास होता है। अब कूनो नेशनल पार्क में इन चार नन्हें चीता शावकों के आने से खुशी की लहर दौड़ गई है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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