भोपाल। मध्य प्रदेश में पूर्व की शिवराज सरकार ने विकायकार्यों के लिए जमकर कर्ज उठाया। लेकिन उसकी जमीनी हकीकीत जानने के लिए अब वर्तमान में कमलनाथ सरकार ने पूर्व सरकार द्वारा लिए गए कर्ज और किए गए खर्च का ब्यौरा मांगा है।  इस संबंध में वित्त विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों से पिछले दस वर्षों में लिए गए कर्जों का हिसाब-किताब मांगा है। यह जानकारी दस दिन के अंदर विभागों को देने के लिए कहा गया है। सरकार के इस आदेश से अफसरों में हड़कंप मच गया है। 

दरअसल, प्रदेश भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। किसान कर्ज माफी का वादा दस दिन में कांग्रेस सरकार ने पूरा करने के लिए कहा था। लेकिन एक साल पूरा होने वाला है अब तक किसान कर्ज माफी पूरी तरह से लागू नहीं की जा सकी है। अब वर्तमान कमलनाथ सरकार यह जानना चाहती है कि पर्व सरकार ने कर्ज लेकर वह पैसा कहा कहां खर्च किया है। क्यों कि प्रदेश सरकार पर वर्तमान में दो लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है। आगे भी स्थिति नाजूक बनी है। सूत्रों के मुताबिक, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पूर्व सरकार ने काम जरूरी नहीं होने पर कर्ज लिया था। अब सरकार पूरी तरह से कर्ज की समीक्षा करना चाहती है। जिससे यह स्थिति साफ हो सके कि कहां कहां कर्ज का पैसा पूर्व सरकार द्वारा खर्च किया गया है। 

इस फार्मेट में देना हो जानकारी

विभाग, संस्था का नाम जिसके द्वारा कर्ज लिा गया है, उसकी जानकारी। जिस संस्था से कर्ज लिया गया है उसका नाम और जानकारी। कर्ज लेने का प्रयोजन क्या रहा, उस राशि से क्या काम कराया जाना है उसकी पूरी जानकारी। किस तारीख को कितना कर्ज लिया गया। यह पूरी जानकारी दस दिन के अंदर सभी विभागों को वित्त विभाग को सौंपना है।