लोकसभा चुनाव: ये पांच फैक्टर जिनकी वजह से बीजेपी को पछाड़ सकती है कांग्रेस

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भोपाल। विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद अब कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भी अच्छे परिणाम की उम्मीद है। कांग्रेस की इस उम्मीद के पीछ कई ऐसे कारण भी हैं जो लोकसभा चुनाव में समीकरण बदल सकते हैं। हम ऐसे पांच कारण पर बात करेंगे जो कांग्रेस को बीजेपी से बढ़त मिलने के संकेत दे रहे है। 2014 में कांग्रेस का प्रदर्शन शर्मनाक था। कांग्रेस 29 सीटों में से सिर्फ दो पर सिमट कर रह गई थी।  

2014 में अपने पतन के बाद अब 2019 में सीटों की संख्या निश्चित रूप से अधिक होगी। यह केवल राजनीति के पंडित ही नहीं बल्कि भाजपा नेता भी निजी तौर पर स्वीकार कर हैं। प्रदेश में इस बार दो फैक्टर पर कांग्रेस की किस्मत का फैसला होगा। पहला तो जातिगत समीकरण और दूसरा क्षेत्रिय मतदान का तरीका। विधानसभा में देखने को मिला है कि कई सीटों पर कांग्रेस ने बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाई है। 

आदिवासी क्षेत्र में कांग्रेस को बढ़त

पहला फैक्टर: विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों का अगर विश्लेषण किया जाए तो तस्वीर कुछ हद तक साफ दिखाई देगी। प्रदेश की 47 आरक्षित सीटों में से बीजेपी ने 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में 32 सीटें जीती थी। जबकि, कांग्रेस के खाते में महज 14 सीटों आईं थीं। लेकिन 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में नतीज पूरी तरह से पलट गए। इस बार कांग्रेस ने आदिवासी वोट बैंक में बड़ी सेंधामारी कर 31 सीटों पर फतह हासिल की। वहीं, बीजेपी को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को आदिवासी बेल्ट में फायदा मिलेगा। जो बीजेपी के लिए खतरे की बात है। 

दलित वोट भी कांग्रेस के पास

दूसरा फैक्टर: पिछले साल हुए दलित आंदोलन की आग बीजेपी को लोकसभा चुनाव में भी झुलसाएगी। विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक भी कांग्रेस को खाते में पहुंचा है। खासतौर से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कांग्रेस को दलितों का अच्छा खासा समर्थन मिला है। प्रदेश की 35 अनुसूचित जाति (एससी) सीट हैं। 2013 में बीजेपी को इनमें से 28 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस को सिर्फ 4 सीटें। लेकिन इस बार बड़ा उलट फेर देखने को मिला। यहां बीजेपी को 18 और कांग्रेस को 17 सीटों पर जीत मिली। यही कारण रहा कि ग्वालियर सीट से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अपना संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए पार्टी से कहा और उन्हें मुरैना से टिकट मिला। जबकि बीजेपी पश्चिमी मप्र में मालवा-निमाड़ क्षेत्र से अपनी ताकत खींचती है, विधानसभा चुनाव में पैटर्न से पता चला है कि यहां दलित और आदिवासी बहुल सीटों पर, यह बुरी तरह से आगे निकल गया।

किसनों में नाराजगी बीजेपी पर भारी

तीसरा फैक्टर: प्रदेश में बीजेपी सरकार को लेकर किसानोंं में भारी आक्रोश था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कर्ज माफी का वादा किया और सत्ता हासिल करने में कामयाब हुई। सरकार बनने के बाद ही सरकार ने 22 लाख किसानों का कर्ज माफ करने का दावा भी किया। लेकिन कांग्रेस कर्ज माफी योजना को पूरी तरह से अमलीजामा पहनाने में कामयाब नहीं हुई और बीजेपी ने इस मुद्दे को भुनाने का पूरा प्रयास किया। जिन किसानों का कर्जा 50 हजार या उससे कम था उन्हें राहत मिली है। कई किसानों अभी भी पार्टी से उम्मीद लगाए हैं। कांग्रेस सरकार ने किसानों से वादा किया है कि जल्द ही उनके खाते में पैसा भी आएगा। 

कांग्रेस की ओर से बार-बार दावा किया जा रहा है कि उसने अपने अधिकांश चुनावी वादों को पूरा किया है। इनमें लगभग 1 लाख परिवारों (पुलिसकर्मियों के परिवार) को सकारात्मक संदेश भेजने वाले पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश जैसे निर्णय शामिल हैं। इन फैसलों से कांग्रेस की साख बढ़ी है जिसे वह लोकसभा चुनाव के लिए भुनाना चाहती है। 

बीजेपी वर्तमान सांसदों के खिलाफ नाराजगी

चौथा फैक्टर: मोदी लहर में कई ऐसे उम्मीदवार भी जीत गए थे जिन्हें जनता पसंद नहीं करती थी। तब लोकसभा चुनाव मोदी के चेहरे पर लड़ा जा रहा था। लेकिन इस बार मोदी लहर जैसी कोई चीज चुनाव में नजर नहीं आ रही है। बीजेपी के सांसदों के खिलाफ काफी नाराजगी है। पार्टी सर्वे में भी इस बात का खुलासा हुआ है। बीजेपी ने कई सांसदों का टिकट काटा है। जिससे जनता में पार्टी की छवि को लेकर सही संदेश नहीं गया है। वहीं, कई सीटों पर टिकट कटने से नाराज बीजेपी नेताओं ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है। फिर भी, बीजेपी को उम्मीद है कि लोकसभा में वह एमपी विधानसभा चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेगी। 

यहां भी कांग्रेस को जीत की उम्मीद

पांचवां कारक यह है कि पश्चिमी मध्य प्रदेश और महाकोशल क्षेत्र के पास के आदिवासी जिलों के अलावा, कांग्रेस ग्वालियर-चंबल के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र में भी कुछ सीटें जीतने के लिए तैयार है। हालांकि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को विंध्य में अप्रत्याशित नुकसान का सामना करना पड़ा, लेकिन यहां भी सीट जीतने की संभावना है। पूर्व सीएम अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह यहां से चुनाव लड़ते हैं और 2014 में वह एक छोटे अंतर से हार गए थे।