नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव पर फोकस, नए चेहरों पर दांव खेलेगी कांग्रेस

राज्य में उप-चुनाव में मिली हार की बड़ी वजह संगठन की कमजोरी को माना जा रहा है और यही कारण है कि पार्टी निचले स्तर पर मजबूती के लिए रणनीति बना रही है। उसके लिए इस मजबूती का आधार नगरीय निकाय और पंचायत के चुनाव बन सकते हैं।

congress

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में विधानसभा (Vidhansabha) के उपचुनाव (By-election) में मिली हार के बाद कांग्रेस (Congress) नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव (Urban Bodies And Panchayat Elections) की तैयारी में जुट गई है। पार्टी इन चुनावों में नए चेहरों और नई पीढ़ी पर दांव लगाने का मन बना रही है, ताकि संगठन को भी मजबूत किया जा सके।

दरअसल, राज्य में उप-चुनाव में मिली हार की बड़ी वजह संगठन की कमजोरी को माना जा रहा है और यही कारण है कि पार्टी निचले स्तर पर मजबूती के लिए रणनीति बना रही है। उसके लिए इस मजबूती का आधार नगरीय निकाय और पंचायत के चुनाव बन सकते हैं।पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Minister Digvijay Singh) भी यह बात कह चुके हैं कि नई कांग्रेस का निर्माण कैसे किया जाए, इस पर विचार किया जा रहा है। जरूरी है, इसके लिए नए लोगों को मौका दिया जाए।

नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव आने वाले हैं और इन चुनावों में नई पीढ़ी को मौका दिया जाए। दिग्विजय सिंह के इस बयान के बड़े मायने निकाले जा रहे हैं और माना जा रहा है कि कांग्रेस अपने को बदलना चाहती है और युवा पीढ़ी को आगे लाने की तैयारी में है। ऐसा होने पर संगठन को मजबूत किया जा सकेगा और भाजपा (BJP) के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकेगी।

जमीनी हकीकत जानने मे जुटी कांग्रेस

वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि इस रणनीति के पीछे बुजुर्गों को कांग्रेस की सियासत से दूर करने की भी योजना है।पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, इसके लिए निचले स्तर के कार्यकतार्ओं और संगठन के पदाधिकारियों से संवाद किए जाने के साथ साथ उनसे जमीनी हालात की रिपोर्ट भी मंगाई जा रही है।

क्या कहते है राजनीतिक विशेषज्ञ

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस का विरोधी दल यानि कि भाजपा परिवर्तन के दौर से गुजर रही है लेकिन भाजपा और कांग्रेस के वर्ग चरित्र में बड़ा अंतर है। कांग्रेस ने अगर अपने नेताओं को खोया तो वह कहीं की भी नहीं रहेगी, यह बात कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने भी कही है। तन्खा ने कहा है कि कमलनाथ (Kamal Nath), दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी (Suresh Pochori) के बगैर कांग्रेस की कल्पना नहीं की जा सकती, इसका आशय है कि कांग्रेस के अंदर भी द्वंद्व है, पीढ़ी परिवर्तन को लेकर, पीढ़ी परिवर्तन हो या ना हो या दोनों में संतुलन बनाकर रखा जाए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here