MP के किसानों के लिए खुशखबरी, मिलेगा 2 लाख का बीमा, जानें पात्रता और डिटेल्स

योजना में दुग्ध प्रदायक सदस्यों और उनके आश्रित परिजनों को सामान्य बीमारी के उपचार के लिये एक लाख रुपये और गंभीर बीमारियों के लिये 2 लाख रुपये प्रति परिवार प्रतिवर्ष बीमा राशि का प्रावधान है।

किसानों

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश के किसानों (MP Farmers के लिए राहत भरी खबर है।अब दुग्ध उत्पादक किसानों के लिये साँची चिकित्सा बीमा योजना (Sanchi Medical Assistance Insurance Scheme) का लाभ मिलेगा।मध्यप्रदेश को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन द्वारा स्वीकृत इस योजना में दुग्ध प्रदायक सदस्यों एवं उन पर आश्रित 3 परिजनों को लाभ दिया जाएगा। परिजनों में पति या पत्नी और 3 माह से 25 वर्ष तक की आयु के 2 बच्चे शामिल हैं।

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मध्यप्रदेश को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (Madhya Pradesh Co-Operative Dairy Federation) द्वारा दुग्ध समितियों के सदस्यों और उनके परिवार के लिये साँची चिकित्सा सहायता बीमा योजना स्वीकृत की गई है। योजना में दुग्ध प्रदायक सदस्यों और उनके आश्रित परिजनों को सामान्य बीमारी के उपचार के लिये एक लाख रुपये और गंभीर बीमारियों के लिये 2 लाख रुपये प्रति परिवार प्रतिवर्ष बीमा राशि का प्रावधान है।बीमा राशि का भुगतान न्यू इण्डिया इंश्योरेंश कम्पनी द्वारा किया जायेगा। योजना में दुग्ध प्रदायक सदस्यों एवं उन पर आश्रित 3 परिजनों को लाभान्वित किया जायेगा। परिजनों में पति या पत्नी और 3 माह से 25 वर्ष तक की आयु के 2 बच्चे शामिल हैं।

वही गुरुवार को कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम शिवराज ने निर्देश दिए है कि प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ निर्यात को भी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। अधिक मुनाफा देने वाली फसलों के उत्पादन को विविधीकरण के माध्यम से बढ़ाने के प्रयास हो। किसानों को कृषि एवं उद्यानिकी फसलों में किसी भी प्रकार का नुकसान न हो, इसका ध्यान रखा जाए। खेती को लाभकारी बनाने के लिए विविधीकरण द्वारा वैकल्पिक फसलों के लिए किसानों को प्रेरित करें। इसके लिए अभियान चलाकर प्रयास करें और किसानों को प्रशिक्षित भी करें। फसलों के विविधीकरण में किसानों को यदि किसी प्रकार की दिक्कतें आती हैं तो उसका समाधान भी करें। कम पानी से पैदा होने वाली फसलों के प्रति किसानों को समझाइश दें।

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सीएम शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए है कि  प्रदेश में कृषि निर्यात नीति के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन कर लिया गया है। कृषि निर्यात प्रोत्साहन के लिए मंडी बोर्ड को नोडल एजेंसी घोषित किया गया है। कृषि निर्यातक अनाज, दलहन, हरी मिर्च और सब्जियों के रूप में कम्पनियाँ पंजीकृत कर ली गई हैं। गेहूँ, सोयाबीन, कोदो- कुटकी, केला, संतरा, मिर्च, लहसुन की कृषि मूल्य श्रृंखला का विश्लेषण कर निर्यात की संभावनाओं का आंकलन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने दिए ये प्रमुख निर्देश

  • जैविक खेती के माध्यम से फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अधिकाधिक प्रयास किए जाएँ।  फसलों में गुणवत्ता बनी रहे, जिससे किसानों को अधिकाधिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने डेयरी उत्पाद एवं दूध से बने पदार्थों के निर्यात को बढ़ाने के लिए भी अधिकरियों को निर्देश दिए।
  • प्रदेश में चंदन की खेती के लिए सम्भावनाएँ तलाशने और इसके लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए निर्देशित किया।
  • मोटे अनाज और कोदो-कुटकी के अधिकाधिक उत्पादन एवं ब्रांडिंग के निर्देश दिए।
  • बासमती चावल के निर्यात को उच्चतम स्तर तक ले जाएँ। बालाघाट के चिन्नोर किस्म के जीआई चावल के निर्यात को बढ़ावा दिया जाए। अगर एवं बम्बू की खेती को प्रोत्साहित किया जाए।
  • प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। केंद्र से समय-समय पर खाद की रैक प्रदेश को प्राप्त हो रही है। किसानों को इसका वितरण बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जाए। वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए।