भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (cm shivraj singh chauhan) और गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (home minister narottam mishra) के तेवर मंगलवार को चिटफंड कंपनियों को लेकर सख्त दिखे। उप चुनावों की गहमागहमी के बाद मंगलवार को कानून और व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि गरीबों का धन हड़पने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि केवल चिटफंड कंपनियों के एजेंटों पर नहीं बल्कि मालिकों के ऊपर भी सख्त कार्रवाई हो। ये निर्देश देने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए कहा कि हम फर्जी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहे हैं और इस संबंध में केवल इन कंपनियों के एजेंटों के विरुद्ध ही कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि उनके मालिकों खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि गरीबों का पैसा हड़पने वाली चिटफंड कंपनियों के मालिकों को तलाश कर उनके खिलाफ वैधानिक कदम उठाने और रकम वापस दिलाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। दरअसल पिछले काफी लंबे समय से चिटफंड कंपनियों के द्वारा गरीबों की खून पसीने की गाढ़ी कमाई का पैसा दोगुना तिगना करने का लालच देकर उनका पैसा न देने की बातें सामने आ रही है। सरकार ऐसे मामलों में लगभग एक सैकड़ा एफआईआर भी दर्ज कर चुकी है जिनमें कई प्रतिष्ठित होने का दावा करने वाली कंपनियां भी शामिल है। हालांकि इस पूरी कार्रवाई में वह बेचारे एजेंट कानून के निशाने पर आ जाते हैं जो कंपनी मालिकों के प्रलोभन में आकर लोगों की खून पसीने की गाढी कमाई निवेश कराते हैं। लेकिन अब मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों के बाद कम से कम ऐसे लोगों को भी न्याय मिलेगा जो ऐसी कंपनियों में केवल नौकरी कर रहे हैं और कंपनी मालिकों के आश्वासन के कारण वे लोगों की जीवन भर की जमा पूंजी का निवेश कराते हैं।

इस पूरे मामले में विशेष बात यह भी है कि कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने अभी तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की है। जबकि काफी शिकायतें उनके पास लंबित हैं जो कि पिछले काफी लंबे समय से विशेषकर चुनाव प्रचार के दौरान भी बीजेपी के नेताओं ने खुद जिला प्रशासन के पुलिस अधिकारियों को सौंपी हैं। बावजूद इसके इन पुलिस अधीक्षकों ने उन शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं करें उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे अधिकारियों की सूची भी मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के पास पहुंच चुकी है और सरकार इन पर भी कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह के मामलों में लेनदेन की शिकायतें भी गृह विभाग तक पहुंची है।