कांग्रेस विधायकों के बागी तेवर से परेशान सरकार, पार्टी की फजीहत

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को सरकार बनाए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन पार्टी के कई विधायकों में असंतोष की भावना बरकरार है। पार्टी लाइन से हटकर ये विधायक लगातार बयान दे रहे हैं। जबकि, पार्टी चाहकर भी इन पर कार्रवाई करने में असमर्थ दिखाई दे रही है। कांग्रेस ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती जिससे उसके विधायकों की संख्या सदन में कम हो और जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सके। 

दरअसल, चाचौड़ से कांग्रेस विधायक और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह लगातार कांग्रेस पर हमलावर हैं। कैबिनेट में उन्हें शामिल नहीं किए जाने से वह नाराज़ चल रहे हैं। कभी वह अपनी की सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ जाते तो कभी वह पार्टी के फैसलों पर सवाल खड़े करते रहते हैं। ऐसे में कांग्रेस की फजिहत होती रहती है। उन्होंने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाकात की थी। जिसके कई सियासी मायने निकाले गए, लेकिन दोनों ही नेताओं ने इस मुलाकात को सामान्य बताया था। वहीं, कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह डंग और मनावर से कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा भी पार्टी के खिलाफ समय समय पर मोर्चा खोलते रहते हैं। 

कांग्रेस को समर्थन दे रही बसपा विधायक रामबाई ने मोदी सरकार की तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े थे। साथ ही उन्होंने सीएए और एनआरसी कानून का समर्थन करने की बात भी कही थी। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने रामबाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी की प्रथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया। रामबाई द्वारा कई बार माफी मांगने के बाद भी पार्टी ने फैसला वापस नहीं लिया है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस में ऐसा कोई एक्शन पार्टी नहीं ले पा रही है। इसके पीछ कई वजह हैं। एक तो पार्टी अपने विधायकों की संख्या सदन में कम नहीं होने देना चाहती, दूसरा यह कि विपक्ष को कोई ऐसा मौका कांग्रेस देना नहीं चाहती जिससे उनकी सरकार पर संकट के बादल छा जाएं। 

फिलहाल कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं। पार्टी के खिलाफ बयानबाज़ी करने वाले विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लक्ष्मण सिंह ने भील जाति के अपमान को लेकर सीएम से सदन में माफी मांगने के लिए कहा है। यही नहीं पूर्व में भी कई मामलों पर सिंह और अलावा सरकार के फैसलों की आलोचना करते रहे हैं। पीसीसी के उपाध्यक्ष चंद्रप्रभास शेखर ने कहा कि, पार्टी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन विधायकों पर कार्रवाई करने का फैसला सीएम कमलनाथ ही लेते हैं। अगर कोई विधायक पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बयान देते है और सीएम पार्टी संगठन से उस विधायक के खिलाफ कार्रवाई करने को कहते हैं तो हम जरूर ऐसा करेंगे। सूत्रों के मुताबिक कई मंत्रियों ने विधायकों के व्यवहार के बारे में शिकायत की है।