बीजेपी में हार के बाद घमासान, ‘माई के लाल’ से हुआ भारी नुकसान

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भोपाल|  मध्य प्रदेश में 15 साल सत्ता में रहने वाली भाजपा केंद्र और राज्य की कई बड़ी योजनाओं, किसानों को कई सौगात देने के बाद भी चौथी बार सरकार नहीं बना पाई| जबकि सभी दिग्गज चुनाव में दम भर रहे थे भाजपा फिर बहुमत से सरकार बनाएगी और कांग्रेस का एक बार फिर सफाया हो जाएगा और दिल्ली से आये नेता वापस दिल्ली लौट जाएंगे| लेकिन हुआ इसके उलट| अब हार के बाद भाजपा में घमसान शुरू हो गया है| हार के कारणों पर मंथन चल रहा है|  हार की समीक्षा और लोकसभा चुनाव की तैयारी को लेकर शनिवार को बुलाई गई बैठक में नेताओं ने जमकर भड़ास निकाली। वहीं पार्टी पदाधिकारियों ने ‘माई का लाल’ बयान को भी भाजपा के लिए बड़ा नुकसान बताया| 

दरअसल, चुनाव से साल भर पहले ही तेजी से आरक्षण को लेकर बहस शुरू हो चुकी थी और पदौन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था| तभी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बार बार अपना बयान दे रहे थे, कि कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता| यह दांव उलटा पड़ा और प्रदेश में जाति संघर्ष तक देखने को मिला| इसके बाद एट्रोसिटी एक्ट आंदोलन के बाद जो हवा बनी वो भाजपा के लिए ज्यादा घातक साबित हुई| अपने गढ़ ग्वालियर चम्बल में कांग्रेस बाजी मार ले गई| यही वो क्षेत्र था जहां सबसे ज्यादा इस आंदोलन का असर देखने को मिला था|  चुनाव में माई के लाल बयान का ज्यादा विरोध हुआ और भाजपा के खाते वाली सीटों पर अधिक नुकसान हुआ, यहां तक कि एक दर्जन मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा| अब हार के समीक्षा की जा रही है, कुछ दबी जुबान में तो कुछ खुलकर इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि माई के लाल से नुकसान हुआ| 

बैठक में जमकर बरसे नेता 

समीक्षा बैठक में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हीरेंद्र सिंह (हीरू) ने तो खुलकर कहा कि इस बार चुनाव में शिवराज सिंह चौहान का ‘माई का लाल’ वाला बयान भारी पड़ा है, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में हालत यह थी कि हम जिस घर पर स्टीकर चिपकाते थे, लोग हमारे सामने ही उन्हें फाड़ देते। वहीं वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने कहा कि जब वरिष्ठ नेताओं को किनारे किया जाएगा तो यही स्थिति बनेगी। शर्मा ने बाद में मीडिया से कहा कि शिवराज सिंह चौहान ने माई का लाल वाले बयान पर लोगों से क्षमा तो मांगी है, लेकिन देर कर दी। यदि वे एक महीना पहले माफी मांग लेते तो आज स्थिति कुछ और होती। इसके अलावा शर्मा ने शिवराज की आभार यात्रा और टाइगर जिन्दा है के बयान पर तंज कसा उन्होंने कहा कि शिवराज अब फ्री हैं और फ्री स्टाइल में कुछ भी बोल सकता है, वहीं आभार यात्रा को लेकर उन्होंने कहा जब बहुमत ही नहीं मिला तो अब शिवराज को इतना परिश्रम करने की क्या जरूरत है। इस बैठक में संजय सक्सेना और रमेश चंद्र शर्मा (गुट्टू भैया) ने सर्वे पर सवाल उठाए। सक्सेना बोले, उम्मीदवार चयन के लिए जो सर्वे कराया गया था, टिकट बांटने में वह नजरअंदाज हो गया। सक्सेना ने हार के बाद बयानबाजी करने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही। युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल कोठारी ने कहा कि हमारे साथ जुड़ी युवाओं की टीम को काम देना चाहिए। वरना भविष्य में वे टूटकर जा सकते हैं। शैलेंद्र प्रधान ने पूर्व विधायकों की उपेक्षा के आरोप लगाए।

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