हार के बाद कांग्रेस में घमासान, जीतू बोले- मुख्यमंत्री जी, कहेंगे तो दे दूंगा इस्तीफा

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इंदौर।

विधानसभा में शानदार प्रदर्शन करने के बाद लोकसभा में करारी हार के बाद कांग्रेस में घमासान शुरु हो गया। 29  में से एक सीट पर सिमटी कांग्रेस में हैरानी की बात तो ये है कि कमलनाथ के मंत्री-विधायक ही अपने बूथों पर प्रत्याशियों को जीत नही दिला पाए।ऐसे में हार के बाद मंत्री निशाने पर आ गए है।जबकी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले ही सब मंत्रियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि इंदौर हर हाल में जीतना है अगर ऐसा नही हुआ तो उनके मंत्री पद पर विचार किया जाएगा। इसी बीच चुनाव के दौरान इंदौर की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री जीतू पटवारी का बड़ा बयान सामने आय़ा है।जीतू का कहना है कि मंत्रियों से इस्तीफा मांगना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। वे कहेंगे तो मैं दे दूंगा।

दरअसल, शुक्रवार शाम को कमलनाथ सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी प्रेस क्लब में मीडिया से मुखातिब हुए। जहां उन्होंने हार स्वीकारते हुए कहा कि इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। जहां तक ईवीएम में गड़बड़ी का सवाल है तो इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेता निर्णय लेंगे। हम जनादेश का आदर करते हैं। अपनी बात जनता को समझाने में हम नाकामयाब रहे। कार्यकर्ताओं ने जी-जान से मेहनत की, लेकिन लोगों ने मोदी को जिताने का मन बना रखा था। जनता का मन पढ़ने में हम असफल हुए। लोकसभा चुनाव में हारने के बावजूद हमारी सरकार को खतरा नहीं है। हम पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और फिर अपने काम का लेखा-जोखा जनता के सामने लेकर जाएंगे। 

वही मंत्रियों के इस्तीफे को लेकर पूछे सवाल पर पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मुझे मंत्री बनाया है। वे चाहेंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है कि वे जिसे चाहें मंत्री रखें। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को रविवार को भोपाल बुलाया है। इसमें पार्टी की हार पर चर्चा हो सकती है।इससे पहले शनिवार को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है जिसमे हार के कारणों की समीक्षा होगी।

अपने ही बूथ पर नही जीता पाए जीतू

राऊ विधानसभा के बिजलपुर में उच्च शिक्षा मंत्री पटवारी के पटवारी चौक वाले बूथ नंबर-94 से कांग्रेस 48 वोट से हार गई।विधानसभा-तीन के जानकी नगर में जहां स्वास्थ्य मंत्री सिलावट का निवास है, उस बूथ से भी भाजपा प्रत्याशी को 309 वोट से जीत मिली। विधानसभा-5 में वल्लभ नगर में जहां कांग्रेस प्रत्याशी संघवी रहते हैं, वहां के बूथ नंबर-8 से भी वे खुद 102 वोट से हार गए। 

चेतावनी के बाद भी कुछ नही कर पाए मंत्री-विधायक

बता दे कि इंदौर लोकसभा सीट की जीत के लिए मुख्यमंत्री मंत्रियों को पद गंवाने की धमकी तक दे चुके थे।बीते दिनों ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं से दो टूक शब्दों में कहा था कि इंदौर सीट मेरे लिए प्रतिष्ठा का विषय है, इसे जीतने का इस बार बेहतरीन मौका है और इस पर पार्टी आलाकमान की भी नजर है। हर मंत्री को मैंने साफ कर दिया है कि उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र से लीड दिलाना ही है, ऐसा नहीं होने पर इस्तीफा जैसे सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।कमलनाथ ने यह भी कहा था कि जिस विधायक ने अपने क्षेत्र में जितने वोटों से विधानसभा चुनाव जीता था, उन्हें इसी तरह लोकसभा चुनाव में भी इतनी ही लीड दिलाना है।बावजूद इसके मंत्री और विधायक जीत नही दिला पाए। ऐसे में इन मंत्रियों पर कार्रवाई होना तय है।

लाखों वोटों से जीते लालवानी

 भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शंकर लालवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार पंकज सांघवी को पांच लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हरा दिया है। शंकर लालवानी को कुल 1068569 और कांग्रेस के पंकज सांघवी को 520815 वोट मिले हैं।शंकर लालवानी ने इंदौर से सुमित्रा महाजन ताई की सर्वाधिक लीड 4.66 लाख से भी आगे निकल गए हैं। इस प्रचंड जीत ने इंदौर में एक इतिहास रच दिया जिसका सालों सालों तक गुणगान किया जाएगा।