Kamal-Nath-is-not-in-a-hurry-for-political-appointments

भोपाल| राजनीतिक नियुक्तियों के इन्तजार में बैठे कांग्रेस नेताओं का इन्तजार अभी और भी आगे बढ़ सकता है| मुख्यमंत्री कमलनाथ कोई जल्दीबाजी नहीं करना चाहते हैं| सत्ता और संगठन का हिस्सा बनने को बेकरार कई नेता पूरा जोर लगा रहे हैं| लेकिन सरकार कोई भी ऐसी नियुक्ति नहीं करेगी जिससे पार्टी के अंदर असहमति की स्तिथि बने| 

हाई कमान की सहमति के बाद ही सभी असंतुष्ट नेताओं को साधने के लिए यह नियुक्तियां की जाएँगी, बताया जा रहा है इसमें विधायकों का ख़ास ख्याल रखा जाएगा जो मंत्री न बनाये जाने से नाराज है| वहीं ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को मौक़ा दिया जाएगा जिन्होंने भाजपा शासनकाल में कांग्रेस की आवाज को उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, भाजपा सरकार के खिलाफ लंबा संघर्ष किया और अपनी काबिलियत को बार-बार सत्ता और संगठन के सामने रखा। विरोध की स्तिथि न बने और नियुक्तियां पारदर्शी हो इसके लिए राजैनतिक नियुक्तियां भी अब फीडबैक के आधार पर की जाएगी। इससे कार्यकर्ताओं में भरोसा भी बढ़ेगा| 

फीडबैक से फाइनल होंगे नाम 

निगम मंडल, आयोगों में नियुक्ति पाने कई नेता सक्रिय है, वही पार्टी के क्षत्रप नेताओं के बीच ही आपस में रस्साकशी है सब के पास अपने समर्थकों की लंबी सूची है कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं है यही कारण है कि मामला हर बार अटक जाता है| इस मामले को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ फीडबैक के आधार पर नाम फाइनल करेंगे| मुख्यमंत्री कमलनाथ किसी भी प्रकार की जल्दी में नहीं है वे विभिन्न निगम मंडलों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों पर नियुक्तियां तो करना चाह रहे है लेकिन वे यह पद योग्य कांग्रेसी नेताओं को देना चाह रहे हैं नाकी सिफारिशों के आधार पर| राजनीतिक नियुक्ति भी प्रत्याशी चयन प्रक्रिया के तर्ज पर की जाएगी। इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर पदाधिकारियों से फीडबैक लिया जाएगा और फिर नामों को आगे भेजा जाएगा। 

विधायकों को रखा जाएगा ध्यान 

इन नियुक्तियों में विधायकों और उनकी पसंद का ख़ास ध्यान रखा जाएगा। ऐसे किसी नेता को जवाबदारी नहीं दी जाएगी, जिसके नाम पर किसी विधायक को कोई आपत्ति हो। नियुक्ति करके वे कोई बवाल नहीं खड़ा करना चाहते हैं। उसे ही बनाया जाएगा, जिसके नाम पर किसी को आपत्ति न हो। ऐसा ही रहा तो निगम-मंडलों में नियुक्ति का सपना देख रहे नेताओं के अरमान पर पानी फिर जाएगा। क्यूंकि कई नेताओं की स्थानीय विधायक से पटरी नहीं बैठती है। वहीं जो विधायक मंत्री नहीं बन पाएंगे उन्हें बड़ा पद देकर संतुष्ट किया जाएगा| सरकार के पास अभी बहुत से ऐसे पद हैं जिन पर नियुक्ति कर सभी साधने की कोशिश की जायेगी, धीरे धीरे नियुक्तियां की जाएंगी|