‘मंत्रिमंडल’ पर दिल्ली में मंथन, नाम लेकर लौटेंगे कमलनाथ

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भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ के मंत्रिमंडल का आकार कैसा होगा, यह अभी तक तय नहीं है। न ही मंत्रिमंडल को शपथ कब दिलाई जाएगी यह तय हो पाया है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि मंत्रिमंडल गठन को लेकर कांग्रेस में जबर्दस्त खींचतान चल रही है। यही वजह है कि मंत्रियों के नामों का फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के दखल से होगा। कमलनाथ दिल्ली में हैं और महत्वूपूर्ण बैठकों के बाद नाम तय होंगे। मंत्री पद के दावेदार विधायक अपने-अपने नेताओं के यहां डेरा डाले हुए हैं। मंत्रिमंडल को लेकर हाईकमान से चर्चा के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली के लिए गुरूवार देर शाम रवाना हुए।  

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 17 दिसंबर को शपथ ली थी। इसके बाद से मंत्री पद के दावेदार सभी विधायक अपने-अपने नेताओं के यहां हाजिरी लगा रहे हैं। ज्यादातर विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं । क्योंकि दिल्ली में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह, अरुण यादव समेत अन्य नेता भी डेरा डाले हुए हैं। कमलनाथ समर्थक विधायक ही भोपाल में डटे हुए हैं। पार्टी सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके मंत्रिमंडल में सिंधिया समर्थक विधायकों की संख्या ज्यादा हो सकती हैं। इसको लेकर सिंधिया ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से चर्चा भी की है। हालांकि अभी तक मंत्रिमंडल को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। यदि मंत्रिमंडल को लेकर एक राय नहीं बनी तो फिर आगे भी बैठक हो सकती है। 

नाम लेकर लौटेंगे कमलनाथ

मुख्यमंत्री कमलनाथ संभवत: शुक्रवार रात तक या शनिवार भोपाल लौटेंगे। वे दिल्ली से अपने मंत्रिमंडल के संभावित चेहरों के नाम लेकर आएंगे। मंत्रिमंडल में कितने सदस्य होंगे, यह भी दिल्ली से तय होगा। हालांकि कमलनाथ अभी मंत्रिमंडल को सीमित रखना चाहते हैं। इसके बाद में विस्तार भी किया जा सकता है| 

सिंधिया-दिग्विजय के बीच मंत्रणा

पार्टी सूत्र बताते हैं कि मंत्रिमंडल के गठन से पहले दिल्ली में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच बंद कमरे में चर्चा भी हो चुकी है। दिग्विजय सिंह अपने विधायक बेटे जयवर्धन सिंह के सिंधिया के निवास पर मिलने पहुंचे थे।

अलावा ने मांगी मंत्रिमंडल में जगह

जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) के अध्यक्ष और कांग्रेस से विधायक डॉ. हीरा अलावा ने गुरुवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलकर मंत्रिमंडल में जगह देने की मांग की है। पेशे से डॉक्टर अलावा ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री बनाए जाने की मांग की है। अलावा ने मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन की उम्मीद है कि जयस को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। डॉ हीरा अलावा ने बताया कि जब जयस की राहुल गांधी से मुलाकात हुई थी, तब उन्होंने सरकार में भागीदारी दिलाने की बात कही थी। यदि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलती है तो फिर राहुल गांधी से बात करेंगे। फिलहाल मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने डॉ. अलावा को मनावर से टिकट दी थी। उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता रंजना बघेल को बड़े बहुमत से हराया है। 

इन विधायकों को मंत्री बनाने का सामाजिक दबाव

मुख्यमंत्री कमलनाथ पर पहली बार जीतकर आए दो विधायकों को मंत्री बनाने का दबाव है। खास बात यह है कि ये दोनों विधायक वैश्य वर्ग से आते हैं। पिछली सरकार में वैश्य वर्ग से 5 मंत्री थे, इनमें से 4 मंत्री जैन थे। कांग्रेस सरकार में जैन समाज के इकलौते विधायक निलय डागा हैं, जो वरिष्ठ कांग्रेस नेता विनोद डागा के बेटे हैं। विनोद डागा लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे हैं और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर पार्टी की लंबे समय तक आर्थिक मदद भी की है। वहीं ग्वालियर से पहली बार चुने गए मुन्नालाल गोयल को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। गोयल को मंत्री बनाने के लिए सिंधिया पैरवी कर रहे हैं। 

यह बन सकते हैं मंत्री 

जानकारी के मुताबिक मंत्रिपरिषद् में गुटों को साधने के अलावा क्षेत्र को साधने की भी कोशिश होगी। सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ मंत्रिमंडल में डॉ. गोविंद सिंह, केपी सिंह, सज्जन सिंह वर्मा, डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ, आरिफ अकील, बाला बच्चन, बिसाहूलाल सिंह, इमरती देवी, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, हुकुमसिंह कराड़ा, नर्मदाप्रसाद प्रजापति जैसे अनुभवी तो जीतू पटवारी, हिना कांवरे, प्रियव्रत सिंह, उमंग सिंघार, तरुण भनोत, संजय शर्मा, सुखदेव पांसे, कमलेश्वर पटेल, सचिन यादव जैसे युवा विधायकों को मौका मिल सकता है। वहीं, निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल गुड्डा व ठा. सुरेंद्र सिंह शेरा भैया भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं।

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