खुफिया विभाग की नज़र में कमलनाथ के मंत्री और विधायक, यह है बड़ा कारण

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भोपाल। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी लगातार इस बात के दावे करती रही है कि केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार बहुत दिनों तक नहीं टिक पाएगी। चुनाव नतीजे आने के बाद से कांग्रेस सरकार की सांसे फूली हुई हैं। भले वह बहुमत का आंकड़ा होने का दावा कर रही है लेकिन अंदरखाने की खबर है कि सरकार कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहती है। इसलिए अब कमलनाथ सरकार अपने ही विधायकों और मंत्रियों पर इंटेलिजेंस के जरिए जसूसी करवा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। 

दरअसल, सरकार को  कमज़ोर विधायकों के दल बदलने का डर सता रहा है। सरकार को चिंता है कि कहीं बीजेपी हॉर्स ट्रेडिंग में कामयाब न हो जाए और प्रदेश में 15 साल लंबा सत्ता का वनवास काटकर आने वाली कांग्रेस से एक बार फिर सत्ता छिन न जाए। इसलिए सरकार हर संभव प्रयास कर विधायकों की जासूसी करवा रही है। मंत्री हों या विधायक उनके आने जाने से लेकर वह किस से मुलाकात कर रहे हैं, यह सब जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंच रही है। पल पल की जानकारी सीएम तक पहुंचाई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इसके लिए सरकार आईबी की मदद ले रही है। 

लोकसभा नतीजे आने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा था। इसके साथ ही इस बात की खबरे सामने आईं थी कि बीजेपी ने सरकार से एक बार फिर दावा पेश करने कि लिए कहा है। जिसके बाद केंद्र तक इस बात का शोर मचा था कि बीजेपी सरकार गिराना चाहती है। विपक्ष को हमलावर देखते हुए कमलनाथ अब चौकन्ने हो गए हैं। उन्होंंने बीजेपी की ओर से मिले संकेत के बाद बिना कुछ कहे जासूसी का तरीका तलाश लिया है। जिससे उन्हें अपने विधायकों की रिपोर्ट मिल रही है।