Kamalnath-scraps-proposal-of-liquor-policy

भोपाल। आर्थिक तंगी से जूझ रही कांग्रेस सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार नए तरीके खोज रही है। अलग अलग विभाग अपनी आय बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे हैं। हाल ही में कैबिनट बैठक से पहले राजस्व बढ़ाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने भी एक प्रस्ताव तैयार किया था। जिससे सरकार के खजाने में बढ़ोत्तरी हो सके। इस प्रस्ताव में प्रदेश में चल रही मदिरा की दुकानों में आहातों को अलग से अनुमति देना का जिक्र था।

जब इस प्रस्ताव के बारे में मुख्मंत्री कमलनाथ को मालूम हुआ उन्होंने तत्काल इसे रद्द करते हुए वाणिज्यिक कर विभाग के अफसरों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि हम इस तरह राजस्व बढ़ाने के बारे में कैसे सोच सकते हैं। हमारे लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि इस सामाजिक बुराई को रोका जाए। कैबिनेट बैठक से पहले ही इस प्रत्साव को बैठक के एजेंडे से बाहर कर दिया गया। यही नहीं उन्होंने उन सभी प्रस्तावों को खत्म कर दिया जो शराब से जुड़े थे। इस मामले में विरोध की आशंका के मद्देनजर सीएम ने सुबह ही वाणिज्यकर मंत्री को फटकार लगाई|

उन्होंने विभाग के उस प्रस्ताव को भी रिजेक्ट कर दिया जिसमें विभाग ने शराब की दुकानों पर विदेशी मंदिरा बेचे जाने का प्रस्ताव पेश किया था। नाथ ने प्रस्ताव को खत्म करने के साथ ही ये संदेश दिया है कि वह किसी भी कीमत पर शराबखानों और अहातों पर बढ़ावा देकर राजस्व बढ़ाने के हक में नहीं है। उनके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस तरह की पहल कर चुके हैं। अब नाथ भी उनकी राह पर चलते हुए यह संदेश दिया है कि वह जनहित के खिलाफ कोई फैसला नहीं लेंगे। वहीं इस प्रस्ताव को लेकर सरकार की किरकिरी हो रही थी| जिसके चलते इसे फिलहाल टाल दिया गया है| 

ये था विभाग का प्रस्ताव

शराब की दुकान के संचालकों को पांच फीसदी अतिरिक्त फीस देकर वह अपनी शाप में अहाता भी खो सकते थे। वर्तमान में दो तरह की आबकारी पॉलिसी लागू हैं। जिन शराब की दुकानों में अहाता है वह आन शाप और जिनमें अहाता नहीं है वह आफ शाप कहलाती हैं। इसके लिए दुकानदारों को आबकारी विभाग में अतिरिक्त फीस अदा करना थी। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस प्रस्ताव को खत्म कर दिया।