kishore kumar death anniversary : अलबेले मिज़ाज के कलाकार, घर के बाहर लिखवाया ‘किशोर से सावधान’

प्लेबैक सिंगिंग के लिए 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते, 80 से अधिक फिल्मों में अभिनय का जलवा बिखेरा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। आज हरफनमौला कलाकार किशोर कुमार (kishore kumar death anniversary) की पुण्यतिथि है। 4 अगस्त 1929 को जन्मे किशोर दा अपने बेमिसाल अभिनय (acting) और अद्भुत गायकी (singing) के लिए जाने जाते हैं। उन्होने प्लेबैक सिंगिंग के लिए 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड (Filmfare Award) जीते और करीब 88 फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा। 13 अक्टूबर 1987 को उन्होने इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया। खंडवा में जन्मे किशोर कुमार की स्मृति में मध्यप्रदेश सरकार ने 1997 में ‘किशोर कुमार अवाॅर्ड’ की शुरुआत की है। आज उनकी पुण्यतिथि पर सीएम शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है।

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किशोर कुमार ने संगीत की विधिवत ट्रेनिंग नहीं ली थ। ये कला उन्हें वरदान के रूप में मिली और आज भी उनके गाए सदाबहार गीत आज भी सबके पसंदीदा हैं। किशोर दा ने 110 से ज्यादा संगीतकारों के साथ 2678 फिल्मों में गीत गाए। गाने और अभिनय के अलावा किशोर कुमार अपने अलबेले स्वभाव के कारण भी जाने जाते थे। उनके मिज़ाज को लेकर कई किस्से मशहूर है। एक बार उन्होने अपने घर के बाहर एक साइन बोर्ड लगवाया जिसपर लिखा था ‘बिवेयर ऑफ किशोर’। इसी से जुड़ा मजेदार किस्सा है कि जब निर्माता-निर्देशक एचएस रवैल उनके घर से बाहर निकलने लगे तो किशोर दा ने उनके हाथ पर काट लिया। अकबकाए निर्देशक ने कारण पूछा तो किशोर दा ने कहा कि आपको मेरे घर का साइन बोर्ड देखना चाहिए था।

उनको लेकर कई किस्से मशहूर है। पैसों को लेकर उनका रवैया सबको पता है। एक बार उन्हें किसी फिल्म निर्माता ने आधे पैसे दिए। इससे नाराज किशोर दा आधे मेकअप में सेट पर पहुंच गए। वो इतने मनमौजी थे कि एक बार बाज़ार में मसूर की दाल देखकर मसूरी जाने का प्लान बना लिया। शरारती इतने कि जब एक इंटरव्यू इसी शर्त पर दिया कि वो खुद अपने से सवाल करेंगे। आशा भोंसले ने उनके बारे में एक मजेदार किस्सा शेयर करते हुए बताया कि फिल्म शराबी के गाने ‘इंतहा हो गई इंतजार की‘ गाने के लिए किशोर कुमार ने पहले इनकार कर दिया था। फिर वो इस शर्त पर तैयार हुए कि किसी शराबी की तरह लेटकर ही वो इसे गाएंगे। आखिर उनके लिए एक टेबिल लगाई गई और उन्होने बाकायदा लेटकर ये गीत रिकॉर्ड किया। इन सब चुहल के बावजूद वे काफी इमोशनल व्यक्ति थे और अपनी जन्मभूमि खंडवा से बेहद प्यार करते थे। जब कभी उनका मन करता वो शूटिंग बीच में छोड़कर खंडवा पहुंच जाते। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम एक बार फिर उनके मधुर गीतों के साथ उन्हें याद कर रहे हैं। वे भले सशरीर हमारे बीच न हो लेकिन पर्दे पर उनकी मौजूदगी और आवाज हमेशा हमारे दिलों में बसी रहेगी।