“इंदौर में टेस्टिंग किट की कमी”- संभागायुक्त का बड़ा बयान, इसीलिये पुंडुचेरी भेजे गए जांच सैंपल!

इंदौर/आकाश धोलपुरे

इंदौर में कोरोना की जांच किट को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है। दरअसल, इंदौर संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने शुक्रवार को साफ किया कि इंदौर से 606 सैम्पल भोपाल भेजे गए है जहां से इन सैम्पल को जांच के लिए विमान से पुंडुचेरी भेजे गए है। बता दें कि दिल्ली के बाद ये दूसरा मौका है जब कोरोना की जांच के लिए सैम्पल प्रदेश के बाहर भेजे गए है अकेले इंदौर में तकरीबन 2 हजार सैम्पल जांच के लिहाज से बैकलॉग में है इन्ही में से आज 606 सैम्पल भेजे गए है।

इस मामले पर इंदौर संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी का एक बड़ा बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने टेस्टिंग किट की कमी को स्वीकारा है। उन्होंने बताया कि शहर में गुरुवार को 428 सैम्पल की जांच आरएनए एक्सटेंशन मशीन के जरिये जांचे गए थे और अभी प्रशासन को आरएनए एक्सटेंशन किट कमी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वर्तमान में आरएनए जांच के लिये मैन्युल मशीन में एक बार मे 12 नमूनों की जांच हो पा रही है वही यदि कायजन किट मिलती है तो एक ही मशीन में 24 सैम्पल पुट किये जा सकेंगे।

बता दे कि कुछ वक्त पहले तक कोरोना जांच के लिए कायजन किट ही इंदौर को मिल रही थी लेकिन अब उसके नही मिलने से सैम्पल की जांच रफ्तार में कमी आ गई है। कमिश्नर आकाश त्रिपाठी की मानें तो इस समस्या के समाधान के लिये लोकल वेंडर से भी बात की गई है लेकिन सभी का कहना है 2 सप्ताह से पहले किट नही दी जा सकेगी। ऐसे के राज्य सरकार भी प्रयास कर रही है कि जांच किट जल्द उपलब्ध कराई जा सके। कमिश्नर आकाश त्रिपाठी ने शुक्रवार को बताया कि इंदौर लैब में 5 मैन्युल आरएनए एक्सटेंशन किट मशीने है और 1 ऑटोमेटिक आरएनए एक्सट्रेक्ट मशीन है। उन्होंने ये भी साफ किया है कि मैन्युल मशीन के लिए मैग्नेटिक व्हीट तकनीक वाली किट आ रही है जिसके चलते एक बार मे एक मशीन में 12 सैम्पल की ही जांच सम्भव है ऐसे कायजन किट मिलने लग जाये तो पहले की ही तरह एक मशीन में 24 आरएनए एक्सट्रैक्ट हो जाएंगे। इंदौर में प्रशासन की मंशा ये है कि कायजन किट मिलना शुरू हो जाये ताकि तेजी से टेस्टिंग का काम पूरा किया जा सके। इंदौर में अब ऑटोमेटिक मशीन के लिए केवल 586 सैम्पल की जांच किट बची है। ऐसे में दूसरा विकल्प ये है कि ICMR से मैग्नेटिक स्टैंड मिल जाये ताकि उपलब्ध 5 मैन्युल मशीनों के जरिये 12 – 12 सैम्पल के हिसाब से जांच की जा सके।

यदि इंदौर को नार्मल, मैन्युल और ऑटोमेटिक किट मिल जाये तो हर दिन लगभग 650 सैम्पल की जांच की जा सकेगी।  इंदौर कमिश्नर कि माने तो आरएनए एक्ट्रैस हो जाने के बाद दूसरी स्टेज की जांच के लिए 4 आरटीपीसीआर मशीन प्रशासन के पास है वही एक मशीन डीएवीवी और एक आईआईटी इंदौर से मिली हुई है जिनको संचालित करने के पर्याप्त स्टॉफ इंदौर में है।

इधर, इंदौर में प्रायवेट लैब को जांच की अनुमति मिलने के बाद एसआरएल सहित अन्य लैब्स से जांच के लिये कवायद शुरू की जा चुकी है और प्रति जांच के भुगतान स्थिति क्लियर होने के बाद जांच किया जाना सम्भव है। कमिश्नर आकाश त्रिपाठी के मुताबिक प्रायवेट लैब की स्थिति क्लियर होने और जांच किट मिलने के बाद इंदौर से सैम्पल बाहर भेजने की आवश्यकता नही होगी उन्होंने कहा की भेजे गए 606 सैम्पल की जांच रिपोर्ट 2 से 3 दिन में आ जायेगी।

इंदौर में कोरोना टेस्टिंग किट की कमी की बात इंदौर कमिश्नर ने स्वीकारी है ऐसे में सवाल ये उठ रहे है की मोदी सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के मैनेजमेंट के लिहाज इंदौर देश के बड़े हाट स्पॉट्स में से एक है तो फिर क्यों राज्य और केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर नही गया और दिल्ली से आये दल ने क्या इस मामले में कोई पूछताछ नही की। वही शहर में युद्धस्तर पर स्क्रीनिंग का काम चल रहा है और संदिग्धों के सैम्पल भी बड़ी संख्या में लिये जा रहे है जिनकी जांच रिपोर्ट के जल्दी आने पर अब सवाल खड़े हो गए है। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार इस और ध्यान दे। नही तो, प्रदेश की राजधानी भोपाल से हजारों और इंदौर से सैंकड़ो सैम्पल, इसी तरह जांच के लिए बाहर भेजे जाएंगे।