मंत्रियो को बाईपास करने का अधिकारियों पर लगा आरोप

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भोपाल| विधानसभा में मंत्रियों के जवाब को लेकर जमकर सियासत हुई, अब इस मामले पर एक बार सियासत गरमा गई है| नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कई विभागों के सचिव और प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए हैं| उनका कहना है की मंत्रियों के बिना अनुमोदन के विधानसभा में प्रश्नों के उत्तर अधिकारियों द्वारा भेजे गए| नेता प्रतिपक्ष विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई है| उन्होंने विशेषाधिकार समिति के माध्यम से कार्रवाई करने की मांग की है, ऐसा ना होने पर जनहित याचिका दायर करने की बात भी भार्गव ने पत्र में कही है| 

दरअसल, विधानसभा में मंत्रियों के जवाब को लेकर जमकर हल्ला हुआ, सदन के अंदर इस मामले पर विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी की| वहीं यह बात सामने आई कि मंत्रियों के बिना अनुमोदन के विधानसभा में प्रश्नों के उत्तर अधिकारियों द्वारा भेजे गए| जिसको लेकर गफलत बनी| नेता प्रतिपक्ष द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा गया है कि संबंधित विभाग के मंत्रियों के नाम से प्रश्न उत्तर पुस्तिका में इसका उल्लेख किया गया है| यह स्थिति अत्यंत आपत्तिजनक एवं और संवैधानिक है ऐसे अधिकारियों तथा मंत्री गणों की कार्यप्रणाली पर तथा उनकी बौद्धिक एवं प्रशासनिक क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगता है| उन्होंने कहा विधायक जो कि वैज्ञानिक रूप से जनप्रतिनिधि और उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर केवल मंत्री द्वारा ही दिए जाने का प्रावधान है | लेकिन संबंधित विभागों के सचिव प्रमुख प्रश्न उत्तर बगैर विभागीय मंत्री का अनुमोदन के विधानसभा को दिए गए| तो ऐसे मामलों में उनका उत्तरदायित्व निर्धारित कर विधानसभा द्वारा कार्रवाई की जाना चाहिए| 

गोपाल भार्गव ने अपने पत्र में लिखा यह स्पष्ट रूप से सदस्यों के प्रमाणित रुप से जानकारी लेने के विशेष अधिकार का हनन है, विधानसभा अध्यक्ष के रूप में विधायकों को प्राप्त उनके संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण है इस कारण इस मामले को विधानसभा के विशेषाधिकार समिति को सौंपे, क्योंकि इस विषय में अधिक साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है सभी के प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध है तथा विशेषाधिकार समिति को निर्देशित करने का कष्ट करें, इसके साथी ही रिपोर्ट अभिमत सहित विधानसभा के आगामी सत्र के पहले दिन सदन में प्रस्तुत की जाए| इस मामले को गंभीरता से ना लेने पर गोपाल भार्गव का कहना है कि विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए  वे उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर करेंगे|