मप्र में विधान परिषद के गठन की तैयारी, 11 मंत्री बढ़ेंगे

भोपाल। मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार अपने वचन पत्र में किए गए एक और वादे को पूरा करने की तैयारी में है। प्रदेश में विधानसभा परिषद को लेकर कवायद तेज़ हो गई है। जल्द ही प्रदेश में विधानसभा के साध ही विधान परिषद भी होगी। परिषद के गठन को लेकर आज एक उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसमें मुख्य सचिव एसआर मोहंति समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। विधानसभा परिषद के गठन के बाद प्रदेश में 11 नए मंत्री बढ़ जाएंगे। साथ ही 70 एमएलसी भी होंगे। 

दरअसल, कांग्रेस ने वचन पत्र में वादा किया था कि वह मध्य प्रदेश में अगर कांग्रेस की सरकार बनती है तो सरकार विधान परिषद का गठन करेंगी। जिसको लेकर आज मुख्य सचिव बैठक लेने जा रहे हैं…और इस बैठक में परिषद को लेकर खाका तैयार किया जाएगा। विधान परिषद के गठन को लेकर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा का कहना है कि विधान परिषद के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि विधान परिषद को लेकर वेतन भत्तों पर खर्चा कुछ ज्यादा ही होगा लेकिन कई एमएलसी भी बनाए जाएंगे कमलनाथ सरकार ने वचन पत्र में जो वादे किए हैं वह पूरे किए जा रहे हैं।

परिषद के गठन पर बीजेपी ने उठाए सवाल

पूर्व मंत्री विश्वास सारंग विधान परिषद के गठन को लेकर बयान दिया है कि कांग्रेस की सरकार हठधर्मिता के साथ चल रही है। अल्पसंख्यक वाली सरकार अभी अपने असंतोष को छुपाने अलग अलग प्रकल्प कर रही है। राजनैतिक रूप से इतना बड़ा फैसला बिना विपक्ष की सलाह के लेना, यह निश्चित रूप से सरकार का गैर जिम्मेदाराना रुख है। सरकार एक तरफ वित्तीय संकट की बात कहती है वहीं दूसरी ओर अपने ऐशोआराम और राजनीतिक असंतुष्टों को संतुष्ट  करने के लिए विधान परिषद का गठन कर रही है। अभी परिषद का गठन करना उचित नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो इसके हम पक्षधर है, लेकिन वो विपक्ष जो 109 की संख्या में है, उससे बिना पूछे इस तरह का फैसला देना गलत है। 

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने भी उठाए सवाल

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने ट्वीट कर सरकार के इस फैसले पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा है कि, विधानपरिषद गठन पर सवाल खर्चे का कतई नहीं है। हाँ,मन में यह आशंका जरूर है कि यह रिटायर्ड अधिकारियों और थके,चुके,पिटे नेताओं का पुनर्वास स्थल बन जायेगा। ताजगी से भरे हुए विचार और समाज जीवन के विविध वर्गो के अनुभव से सरकार की नीति व निर्णय को समृद्ध करने के लिए गठन तो नहीं ही है !

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