CM कमलनाथ बोले-दिसंबर से फिर शुरू होगी कर्जमाफी, पीड़ित किसानों को बांटेंगे मुआवजा

विदिशा।

प्रदेश का किसान अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ है।सरकार किसानों की कर्जमाफी के लिए वचनबद्ध हैं, जिन किसानों की कर्जमाफी किन्ही कारणों की वजह से नहीं हो सकी है, उनकी भी कर्जमाफी जल्द होगी। खेती को मुनाफे का व्यवसाय बनाकर खुशहाल बनाएंगे। यह बात सीएम कमलनाथ ने शुक्रवार को विदिशा में अपने संबोधन पर कही। 

सीएम ने कहा कि विदिशा जिले में 86 हजार किसानों का कर्ज माफ हुआ है। शेष किसानों की कर्ज माफी की प्रक्रिया प्रचलन में है।भाजपा झूठ की राजनीति करती है। किसानों की कर्जमाफी को झूठा बताया जाता है, जबकि यह प्रक्रिया अब भी जारी है। पहले चरण में किसानों का 50 हजार तक का कर्ज माफ किया गया। अगले माह से दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। 

सीएम ने कहा कि 11 माह में उन्हें सिर्फ 6 माह ही काम का मौका मिला है। इस अवधि में विपरीत हालातों में भी वे प्रदेश के विकास के लिए काम कर रहे हैं। पिछले दिनों हुई अति-वृष्टि से हमारे किसानों की फसलें चौपट हुई हैं और अधोसंरचना को भी भारी नुकसान पहुँचा है  अतिवर्षा से प्रदेश को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार प्रदेश को सहायता राशि नहीं दे रही। । केन्द्र सरकार मदद देने के मामले में प्रदेश की जनता से सौतेला व्यवहार कर रही है। केन्द्रीय अध्ययन दल के सर्वे के बाद भी प्रदेश को अभी तक कोई भी सहायता राशि प्राप्त नहीं हुई है।  इसके बावजूद राज्य सरकार ने किसानों को राहत राशि देना शुरु कर दिया है।अब केंद्र से राशि मिले या न मिले, वे पीड़ित किसानों को मुआवजा बांटेंगे।

युवाओं पर फोकस

नाथ ने आगे कहा कि नए निवेश से प्रदेश में बदलाव आएगा। हम युवाओं को मनपसंद रोजगार के अवसर देंगे। समृद्ध मध्यप्रदेश का सपना साकार होगा। अल्प समय में किए गए प्रयासों से उद्योगों की प्रदेश के प्रति रुचि बढ़ी है, वे निवेश के लिए आगे आए हैं।  हमारा लक्ष्य है कि नई सोच के युवाओं को, जो स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ना चाहता हैं, उन्हें अपने ही प्रदेश में मनपसंद रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि  नौजवानों के रोजगार के बारे में उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा नहीं मिलने के कारण हमारे नौजवान इंटरव्यू भी नहीं निकाल पाते थे, लेकिन हमारी सरकार चाहेगी कि अच्छे कॉलेज खुले, अच्छे शिक्षण संस्थान खुले जिससे हमारा नौजवान बेरोजगार नहीं रहे।